उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर समतापमंडलीय ओज़ोन में असामान्य वृद्धि: भारतीय एसटी/एमएसटी रडार नेटवर्क और गुब्बारा-वाहित प्रयोगों से मिली जानकारी
होम / उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर समतापमंडलीय ओज़ोन में असामान्य वृद्धि: भारतीय एसटी/एमएसटी रडार नेटवर्क और गुब्बारा-वाहित प्रयोगों से मिली जानकारी

अगस्त 26, 2026

समतापमंडलीय ओज़ोन परत, जो 25 से 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर सबसे ज़्यादा तीव्र होती है, पृथ्वी की सतह तक पहुँचने वाली सौर पराबैंगनी विकिरणों की मात्रा को नियंत्रित करती है। जब सूक्ष्म मात्रा में उपस्थित गैस क्षोभमंडल से निचले और मध्य समतापमंडल में पहुँचती हैं, तो समतापमंडल की रसायनिकी बदल जाती है, जिससे आमतौर पर समतापमंडल ओज़ोन का क्षय होता है। इसके विपरीत, मध्य-अक्षांशीय हस्तक्षेपों और क्रमणीय संवहन के परिणामस्वरूप ऊपरी क्षोभमंडल और निम्न समतापमंडल में कहीं-कहीं ओज़ोन की मात्रा बढ़ सकती है। विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में इन गतिविधियों की जांच करने के लिए अनेक भारतीय राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं (एसपीएल, एनएआरएल, शार, सीयूएसएटी, आईआईटीएम, एआरआईईएस और कलकत्ता विश्वविद्यालय) के वैज्ञानिकों ने 12-18 फरवरी 2024 के दौरान एक संयुक्त प्रयोगात्मक अभियान चलाया। नेटआरएडी-एएसएमए (एशियाई ग्रीष्मकालीन मॉनसून प्रतिचक्रवात के समतापमंडल-क्षोभमंडल/मध्यमंडल- समतापमंडल-क्षोभमंडल रडार और गुब्बारा वाहित मापन अभियानों का नेटवर्क) नाम की इस पहल के अंतर्गत गादंकी, कोचिन, हरिंघटा और नैनीताल में एसटी/एमएसटी रडार का एक नेटवर्क संचालित किया गया। इसके साथ ही, तिरुवनंतपुरम, पुणे, सिलखेड़ा और कोलकाता सहित सभी चार रडार स्थलों से एक साथ रेडियोसौंद और ओजोनसौंद प्रमोचित किए गए, जिनका मुख्य केंद्र बालासोर का भारतीय उपोष्णकटिबंधीय केंद्र था।

एसपीएल/इसरो के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान के दौरान, समतापमंडल में ओज़ोन की एक नई और अभूतपूर्व रूप से बढ़ी हुई परत देखी गई, जो अपने सामान्य जलवायु संबंधी औसत से लगभग 50 नैनोबार अधिक थी और इसने समतापमंडल में ओज़ोन के सामान्य अधिकतम स्तर को भी पार किया। यह विशिष्ट घटना बंगाल की खाड़ी के ऊपरी हिस्से के पास देखी गई—एक ऐसा क्षेत्र जहाँ गहन संवहन की प्रक्रिया होती है। यह असामान्य परत 2.1 से 2.4 किलोमीटर मोटी थी और 24 घंटे से ज़्यादा समय तक बनी रही। एसटी/एमएसटी रडार नेटवर्क से मिले डेटा से पता चलता है कि समतापमंडल ओज़ोन की इस बढ़ी हुई परत के मुख्य कारण या तो वायु द्रव्यमान का संपीडन था या फिर मध्य-अक्षांशीय पवन का अभिवहन और हस्तक्षेप, जैसा कि हरिंघटा में ऊपरी क्षोभमंडल में तीव्र ऊर्ध्ववाह और निम्न समतापमंडल में अधोप्रवाह सहित उच्च विक्षोभ की गतिविधियों से भी संकेत मिलता है। ये परिणाम समतापमंडलीय ओज़ोन के वितरण के बारे में महत्वपूर्ण नई जानकारी प्रदान करते हैं, जिसका समतापमंडलीय रसायनिकी, वायुमंडलीय परिसंचरण और क्षेत्रीय विकिरण बजट पर काफ़ी असर पड़ता है।

यह शोध कार्य अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन के प्रतिष्ठित जर्नल “अर्थ एंड स्पेस साइंस” (https://doi.org/10.1029/2025EA004791). में प्रकाशित हुआ है।

चित्र 1. बालासोर में (क) घटना दिवस, अर्थात 13 फरवरी 2024 और (ख) गैर-घटना दिवस, अर्थात 14 फरवरी 2024 को गादंकी के ऊपर ओज़ोन के आंशिक दबाव और तापमान की ऊँचाई के प्रोफ़ाइल देखे गए।

बालासोर में (क) घटना दिवस, अर्थात 13 फरवरी 2024 और (ख) गैर-घटना दिवस, अर्थात 14 फरवरी 2024 को गादंकी के ऊपर ओज़ोन के आंशिक दबाव और तापमान की ऊँचाई के प्रोफ़ाइल देखे गए।

चित्र 2. घटना दिवसों (12 और 13 फरवरी 2024) के दौरान, जब ओज़ोन स्तर बढ़ा हुआ देखा गया, और गैर-घटना दिवस (14 फरवरी 2024) के दौरान, जब ओज़ोन का स्तर सामान्य था, विभिन्न एसटी/एमएसटी रडारों से मापी गई हवा की लम्बवत गति की ऊँचाई प्रोफ़ाइल। घटना के दिनों के दौरान शीत-बिंदु क्षोभसीमा और O3 संवर्धित ऊँचाइयों को चिह्नित किया गया है।

 घटना दिवसों (12 और 13 फरवरी 2024) के दौरान, जब ओज़ोन स्तर बढ़ा हुआ देखा गया, और गैर-घटना दिवस (14 फरवरी 2024) के दौरान, जब ओज़ोन का स्तर सामान्य था, विभिन्न एसटी/एमएसटी रडारों से मापी गई हवा की लम्बवत गति की ऊँचाई प्रोफ़ाइल। घटना के दिनों के दौरान शीत-बिंदु क्षोभसीमा और O3 संवर्धित ऊँचाइयों को चिह्नित किया गया है।