20 अप्रैल, 2026
अंतरिक्ष यान मिशन प्रचालन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन "एसएमओपीएस-2026" का द्वितीय संस्करण "स्मार्ट और सतत अंतरिक्ष मिशन प्रबंधन के लिए अभिनव प्रचालन -आगामी पीढ़ी" विषय पर 8-10 अप्रैल, 2026 को बेंगलूरु, भारत में आयोजित किया गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), एस्ट्रोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया (एएसआई) और इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स (आईएए) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य मिशन प्रचालन प्रबंधन, उन्नत मिशन डिजाइन, स्वचालन, दीर्घ तारामंडल प्रबंधन, मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन, अंतरिक्ष रोबोटिक्स, अंतरिक्ष नीति, चंद्र और अंतरग्रहीय अन्वेषण, अंतरिक्ष प्रणालियों में साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), भू केंद्र प्रचालन में वर्तमान और भविष्य के रुझान आदि से संबंधित विषयों की एक विस्तृत शृंखला को आच्छादित करने के साथ ही ऊर्ध्व प्रवाह और अनुप्रवाह, दोनों क्षेत्रों में भविष्य की तकनीकों पर भी चर्चा करना था। एसएमओपीएस-2026 के अंतर्गत 10 अप्रैल को छात्रों और युवा पेशेवरों के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस सम्मेलन का उद्घाटन 8 अप्रैल,2026 को इसरो के पूर्व अध्यक्ष/अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) के सचिव श्री ए. एस. किरण कुमार ने अध्यक्ष, इसरो /सचिव, अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) डॉ. वी. नारायणन, यू आर राव उपग्रह केंद्र (यूआरएससी) के निदेशक श्री एम. शंकरन, आईएए के महासचिव डॉ. जीन मिशेल कॉन्टेंट और इसरो दूरमिति, अनुवर्तन और आदेश संचारजाल (इस्ट्रैक) के निदेशक डॉ. ए. के. अनिल कुमार की उपस्थिति में किया।
भारत में अपनी तरह के एकमात्र इस सम्मेलन में शामिल प्रमुख विषय निम्नलिखित थे:
120 मौखिक और 88 पोस्टर प्रस्तुतियों के अलावा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए); सेंटर नेशनल डी'एट्यूड्स स्पैटियल्स (सीएनईएस); जर्मन एयरोस्पेस सेंटर ड्यूश्स ज़ेंट्रम फ़ुर लुफ़्ट- उंड राउमफ़ाहर्ट (डीएलआर); इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल प्रॉब्लम्स (आईबीएमपी), रूस; इंस्टीट्यूट कॉस्मिचेस्किह इस्लेडोवानी (आईकेआई), रूस; नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा), संयुक्त राज्य अमेरिका; जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जाक्सा); सेलेस्ट्राक; यूरोपियन ऑर्गनाइजेशन फॉर द एक्सप्लॉयटेशन ऑफ मेटियोरोलॉजिकल सैटेलाइट्स (ईयूमेटसैट); यूरोपियन टेलीकम्युनिकेशंस सैटेलाइट ऑर्गनाइजेशन (ईयूटेलसैट); डेल्फ़्ट यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (टीयू डेल्फ़्ट), नीदरलैंड्स और कनाडा के संस्थानों के अग्रणी क्षेत्र विशेषज्ञों ने मुख्य वक्ता और पैनलिस्ट के रूप में भाग लिया।
इस सम्मेलन ने एक अद्वितीय नेटवर्किंग मंच के रूप में कार्य किया, जो अंतरिक्ष एजेंसियों, स्टार्ट-अप्स, उद्योग और शिक्षाविदों को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों पर दृष्टिकोण साझा करने और तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष परिदृश्य में उभरती चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक साथ लाता है।
सम्मेलन के अंतिम दिन एक कार्यशाला आयोजित की गई जिसमें अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर रोबोटिक मिशन प्रचालन, अंतरिक्ष क्षेत्र जागरूकता, अंतरिक्ष अनुप्रयोग, मानव अंतरिक्ष मिशन और अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण जैसे विषयों पर आमंत्रित वार्ताएं आयोजित की गई और इसमें जबरदस्त भागीदारी देखी गई।
अपने उद्घाटन भाषण में, इसरो के अध्यक्ष ने अंतरिक्ष अभियानों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए अंतरिक्ष यान मिशन प्रचालन की सटीक योजना और त्रुटिहीन निष्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में उभरती चुनौतियों के नवीन समाधान खोजने के लिए भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र को वैश्विक समकक्षों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने की आवश्यकता को दोहराया।
सत्र के प्रमुख विषयों में से एक तकनीकी और नीतिगत दोनों पहलुओं से उत्पन्न होने वाली वर्तमान तथा आगामी चुनौतियों का सामना करनाथा, जो विघटनकारी तकनीकी नवाचार, विशाल अंतरिक्ष समूहों के आगमन, अंतरिक्ष यातायात की बढ़ती भीड़ और पृथ्वी से परे अधिक महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष अन्वेषणों के परिणामस्वरूप विविध, वितरित मिशन प्रचालन अवधारणाओं की बढ़ती जटिलता से संबंधित हैं। सत्रों के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया गया, जो मानव-मशीन तालमेल के साथ अधिक स्वायत्त और कुशल मिशन प्रचालन को सक्षम बनाती है।
आर्यभट्ट उपग्रह से लेकर निसार तक, सभी निम्न भू कक्षा और गहन अंतरिक्ष मिशनों के लिए अंतरिक्ष यान प्रचालन का केंद्र, इस्ट्रैक जिसके नाम ऐतिहासिक मंगलयान मिशन, चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग, सूर्य के चारों ओर लैग्रेंजियन बिंदु में आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान की स्थापना और स्पैडेक्स मिशन में डॉकिंग जैसे कई ऐतिहासिक उपलब्धियां शामिल हैं, उस केंद्र ने एसएमओपीएस-2026 के आयोजन में आग्रणी भूमिका निभाई। भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र के उदारीकरण और इसरो द्वारा मानव अंतरिक्ष मिशनों की शुरुआत के मद्देनजर, एसएमओपीएस-2026 ने विभिन्न विषयों पर विचारोंके समृद्ध संगम के रूप में कार्य किया, जिससे भविष्य के लिए अंतरिक्ष मिशन प्रचालन के लिएक एक सुरक्षित संस्थिर और सुव्यवस्थित दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय के बीच सहयोग, सहकार्य और साझेदारी को बढ़ावा मिला।