इसरो ने मेघालय के उमियम स्थित एनईसैक में 23वें राष्ट्रीय अंतरिक्ष विज्ञान संगोष्ठी (एनएसएसएस-2026) का आयोजन किया। होम / एनएसएसएस-2026

02 मार्च, 2026

इसरो ने मेघालय के उमियम स्थित एनईसैक में 23वें राष्ट्रीय अंतरिक्ष विज्ञान संगोष्ठी (एनएसएसएस-2026) का आयोजन किया।

एनएसएसएस-2026 का उद्घाटन सत्र 23 फरवरी, 2026 को मेघालय के उमियम स्थित एनईसैक में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व अध्यक्ष, इसरो / पूर्व सचिव, अंतरिक्ष विभाग और अंतरिक्ष आयोग के सदस्य श्री ए एस किरण कुमार थे। बाईं तरफ अध्यक्ष, इसरो / सचिव, अंतरिक्ष विभाग डॉ. वी नारायणन बेंगलूरु स्थित इसरो मुख्यालय से ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

इसरो के प्रमुख द्विवार्षिक विज्ञान संबंधी महत्वपूर्ण कार्यक्रम, राष्ट्रीय अंतरिक्ष विज्ञान संगोष्ठी (एनएसएसएस-2026) का 23वां संस्करण 23 से 27 फरवरी, 2026 तक मेघालय के उमियम स्थित उत्तर-पूर्वी अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (एनईसैक) में आयोजित किया गया। यह संगोष्ठी भारत में वायुमंडलीय, अंतरिक्ष और ग्रहीय विज्ञान सहित खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी के क्षेत्रों में वैज्ञानिक आदान-प्रदान के लिए शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और पेशेवरों को एक साथ लाकर एक प्रमुख राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करती है।

23 फरवरी, 2026 को एनएसएसएस-2026 के उद्घाटन समारोह में पूर्व अध्यक्ष, इसरो / पूर्व सचिव, अंतरिक्ष विभाग, अंतरिक्ष आयोग के सदस्य और राष्ट्रीय आयोजन समिति (एनओसी) के अध्यक्ष श्री ए एस किरण कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अध्यक्ष, इसरो / सचिव, अंतरिक्ष विभाग डॉ. वी. नारायणन ने उद्घाटन समारोह में ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया। उद्घाटन समारोह में एनएसएसएस-2026 के सारांश खंड का औपचारिक विमोचन किया गया और उसके बाद अंतरिक्ष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।

अपने उद्घाटन भाषण में, श्री ए.एस. किरण कुमार ने एनई-सैक में इस राष्ट्रीय उपलब्धि की मेजबानी पर गर्व व्यक्त किया और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) के लिए केंद्र-राज्य सहयोग और क्षमता निर्माण को मजबूत करने में इसकी भूमिका पर बल दिया। अध्यक्ष, इसरो डॉ. वी. नारायणन ने कहा कि आदित्य-एल1, एक्सपोसैट और चंद्रयान शृंखला जैसे प्रमुख मिशनों के परिणामों को साझा करने के लिए एनएसएसएस-2026 एक महत्वपूर्ण सेतु का काम करने के साथ ही भारत के अंतरिक्ष विजन 2047 के लिए उत्प्रेरक का काम करता है। इसरो के वैज्ञानिक सचिव श्री एम. गणेश पिल्लई ने कहा कि इस संगोष्ठी में अंतरिक्ष विज्ञान और सहायक प्रौद्योगिकियों में मौजूद क्षमताओं और कमियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा और उन्हें दूर करने की योजना बनाई जाएगी। तिरुवनंतपुरम स्थित आईआईएसटी के कुलपति प्रोफेसर दीपांकर बनर्जी ने वैज्ञानिक कार्यक्रम का विवरण प्रस्तुत किया और विभिन्न विषयों के बीच संवाद के महत्व पर बल दिया। इसरो मुख्यालय में अंतरिक्ष विज्ञान कार्यक्रम के निदेशक डॉ. तीर्थ प्रतिम दास एनएसएसएस की उत्पत्ति और इसके विकास, विशेष रूप से संगोष्ठी के 2022 संस्करण के बाद से इसके मूल्य संवर्धनों की याद दिलाते हुए दर्शकों को अतीत में ले गए।

 श्री ए एस किरण कुमार द्वारा एनएसएसएस-2026 की सारांश पुस्तक का विमोचन।
श्री ए एस किरण कुमार द्वारा एनएसएसएस-2026 की सारांश पुस्तक का विमोचन।

संगोष्ठी की उत्पत्ति और विकास पर विचार करते हुए, यह याद किया गया कि विशाखापत्तनम स्थित आंध्र विश्वविद्यालय में वर्ष 1978 के अपने प्रथम संस्करण के बाद से इस संगोष्ठी ने एक उल्लेखनीय यात्रा तय की है। भारतीय रॉकेट सोसाइटी संगोष्ठी से विकसित होकर, इसे प्रारंभ में इंकोस्पार संगोष्ठी के रूप में जाना जाता था और वैश्विक मंच के लिए शोध पत्रों की समीक्षा करने हेतु इसे अंतरराष्ट्रीय कोस्पार बैठकों से ठीक पहले आयोजित करने की रणनीतिक योजना बनाई गई थी। दशकों से, इसका दायरा "सतह से लेकर गहन अंतरिक्ष तक" के अनुसंधान को शामिल करते हुए विस्तृत हुआ है, जिसमें भू और अंतरिक्ष आधारित दोनों अध्ययनों को एकीकृत किया गया है।

एनएसएसएस-2026 में कई परिवर्तनकारी सुधार किए गए। एनईसैक द्वारा पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के नौ स्थानों पर एक गहन वर्ष-भर चलने वाला क्षेत्रीय आउटरीच कार्यक्रम (आरओपी) आयोजित किया गया, जिसके माध्यम से 867 छात्रों तक पहुंचा गया। आरओपी के माध्यम से, आयोजकों ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के मेधावी छात्रों (स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर) और उत्साही शिक्षकों की पहचान की और उन्हें पुरस्कृत किया, जिनमें से लगभग 30 मेधावी छात्रों को एनएसएसएस-2026 में भाग लेने के लिए चुना गया। आयोजकों ने विभिन्न माध्यमों से देश के अन्य हिस्सों से भी 50 मेधावी स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों की पहचान की, साथ ही इसरो स्टार्ट-2024 और स्टार्ट-2025 जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को भी शामिल किया। कुल मिलाकर, देश के विभिन्न हिस्सों से 80 स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को विशेष छात्र सत्र में भाग लेने के लिए प्रायोजित किया गया। संगोष्ठी के इस संस्करण ने तकनीकी सत्रों और प्रदर्शनियों में स्टार्टअप और निजी उद्योग को रणनीतिक रूप से एकीकृत करके शैक्षिक विलगाव को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम भी उठाया, जिससे एक मजबूत राष्ट्रीय नवाचार पाइपलाइन को बढ़ावा मिला।

एनएसएसएस-2026 के तकनीकी कार्यक्रम में सतह से लेकर गहन अंतरिक्ष तक ब्रह्मांड का अन्वेषण करने वाले बहुविषयक अनुसंधान का संगम शामिल था। संगोष्ठी के पिछले सभी संस्करणों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए, एनएसएसएस-2026 में कुल 817 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। ये शोध पत्र मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन, मध्य वायुमंडल और वायुमंडलीय विज्ञान, सौर और ग्रहीय विज्ञान, खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी, सक्षम प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों को कवर करने वाले छह समानांतर सत्रों में वितरित किए गए थे; साथ ही एक समर्पित छात्र सत्र भी था, जिसमें देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के उपर्युक्त 80 स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के छात्र शामिल थे। प्रत्येक समानांतर सत्र में क्षेत्र-विशिष्ट चर्चाओं के लिए विशेष सत्र आयोजित किए गए ताकि कमियों और नवीन अवधारणाओं को उजागर किया जा सके। युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए, कार्यक्रम में इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लघु मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियाँ शामिल थीं।

इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और छात्रों के बीच संवाद सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें पूर्व अध्यक्ष, इसरो / सचिव, अंतरिक्ष विभाग श्री ए.एस. किरण कुमार और गगनयात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के साथ विशेष संवाद सत्र शामिल थे। इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न पहलुओं पर उन्नत व्याख्यान दिए ताकि वे अपने विचारों और अवधारणाओं को सही दिशा दे सकें। पांच दिनों तक चले इस कार्यक्रम के दौरान, इसरो/अंतरिक्ष विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने छात्रों को गहन मार्गदर्शन प्रदान किया। इस कार्यक्रम ने छात्रों को भारत के अंतरिक्ष विज्ञान मिशनों के डेटा का उपयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया, जिसके परिणामस्वरूप कई छात्रों ने भारत के अंतरिक्ष विज्ञान मिशनों के डेटा का उपयोग करके वैज्ञानिक निष्कर्ष निकाले, जिन्हें संगोष्ठी के दौरान प्रस्तुत किया गया। संगोष्ठी में छह स्थानीय शिक्षण संस्थानों के लगभग 300 स्कूली छात्र भी शामिल हुए, जिन्होंने अंतरिक्ष प्रदर्शनी का दौरा किया। स्थानीय स्कूलों के 50 अन्य छात्रों को गगनयात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से वार्तालाप करने का अवसर मिला।

एनएसएसएस-2026 का पांच दिवसीय कार्यक्रम 27 फरवरी, 2026 को अपने समापन सत्र के साथ समाप्त हुआ, जिसमें नई अवधारणाओं, विचारों और स्व-मूल्यांकन पर जोर दिया गया, साथ ही प्रेरित छात्रों का एक समूह तैयार किया गया, जो देश के अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम को समृद्ध बनाने में योगदान देगा और भारत के अंतरिक्ष विजन 2047 को पूरा करने में सहयोग प्रदान करेगा।