इसरो ने ‘चंद्रयान मिशनों के माध्यम से चंद्रमा का वैज्ञानिक अन्वेषण’ विषय पर राष्ट्रीय बैठक आयोजित की।
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29 सितंबर, 2026

बेंगलूरु में लिओस, इसरो में आयोजित चंद्रयान राष्ट्रीय बैठक में शिक्षाविद, संकाय सदस्य, अनुसंधानकर्ता और इसरो/डीओएस के केंद्रों के सेवारत एवं सेवानिवृत्त वैज्ञानिक शामिल हुए। इस बैठक में ग्रहीय विज्ञान, खगोल जीव विज्ञान, कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग की अनेक शाखाएं, संरचना और अन्य अनेक क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे।

बेंगलूरु में लिओस, इसरो में आयोजित चंद्रयान राष्ट्रीय बैठक में शिक्षाविद, संकाय सदस्य, अनुसंधानकर्ता और इसरो/डीओएस के केंद्रों के सेवारत एवं सेवानिवृत्त वैज्ञानिक शामिल हुए। इस बैठक में ग्रहीय विज्ञान, खगोल जीव विज्ञान, कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग की अनेक शाखाएं, संरचना और अन्य अनेक क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे।

28 सितंबर 2026 को, इसरो ने बेंगलूरु में स्थित विद्युत प्रकाशिकी प्रणाली प्रयोगशाला (लिओस) में 'चंद्रयान मिशनों के माध्यम से चंद्रमा का वैज्ञानिक अन्वेषण' विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय बैठक (28-30 सितंबर 2026) प्रारंभ की। इस बैठक में लगभग 150 पंजीकृत प्रतिभागी शामिल हुए, जिनमें भारतीय शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के 75 प्रतिभागी थे, जो 45 से ज़्यादा शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इस सूची में देश भर के अनेक शैक्षणिक संस्थानों में चंद्रमा से जुड़े अनुसंधान में सक्रिय रूप से शामिल 36 छात्र भी शामिल थे।

इसरो के वैज्ञानिक सचिव, श्री एम. गणेश पिल्लई ने इस राष्ट्रीय बैठक का उद्घाटन किया। 28 सितंबर, 2026 को उद्घाटन सत्र में अपने स्वागत भाषण के दौरान, लिओस के निदेशक श्री आर. वेंकटेश्वरन ने कहा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की सफलता का असली पैमाना वैज्ञानिक खोजों का विस्तार और उनकी गहराई है। इस राष्ट्रीय बैठक की पृष्ठभूमि तैयार करते हुए, इसरो मुख्यालय के विज्ञान कार्यक्रम कार्यालय के निदेशक डॉ. तीर्थ प्रतिम दास ने देश के अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम के भविष्य को आकार देने की प्रक्रिया में छात्र समुदाय को सक्रिय रूप से शामिल करने और अंतरिक्ष विज़न 2040 को साकार करने की दिशा में राष्ट्रीय क्षमताओं का तालमेल बिठाने के लिए समय पर कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) के निदेशक प्रोफ़ेसर अनिल भारद्वाज ने चंद्रयान-1, 2 और 3 मिशनों के विश्व-स्तरीय वैज्ञानिक योगदान, आगामी चंद्रयान-4 और 5 मिशनों की विशेषता और भविष्य के अवसरों के बारे में बताया। इसरो के वैज्ञानिक सचिव श्री एम. गणेश पिल्लई ने अपने उद्घाटन भाषण में चंद्रयान मिशन शृंखला के वैश्विक प्रभाव का उल्लेख किया। इनमें चंद्रयान-2 पर लगे कक्षीय उच्च विभेदन कैमरा (ओएचआरसी) से चांद की सबसे साफ़ तस्वीरें लेना और चंद्रयान-3 की चंद्रमा के ऊंचे अक्षांशों पर पहली बार सफल मृदु अवतरण जैसी उपलब्धियां शामिल हैं। उन्होंने भारत की चंद्र अन्वेषण यात्रा को सुविधाजनक बनाने और देश को वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में एक प्रमुख योगदानकर्ता बनाने में शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों की भूमिका पर जोर दिया।

28 सितंबर, 2026 को चंद्रयान राष्ट्रीय  बैठक के उद्घाटन सत्र के दौरान। बाईं ओर से: श्री आर. वेंकटेश्वरन, निदेशक, लिओस; प्रो. अनिल भारद्वाज, निदेशक, पीआरएल; श्री एम. गणेश पिल्लई, वैज्ञानिक सचिव, इसरो; और डॉ. तीर्थ प्रतिम दास, निदेशक, विज्ञान कार्यक्रम कार्यालय, इसरो मुख्यालय।

28 सितंबर, 2026 को चंद्रयान राष्ट्रीय बैठक के उद्घाटन सत्र के दौरान। बाईं ओर से: श्री आर. वेंकटेश्वरन, निदेशक, लिओस; प्रो. अनिल भारद्वाज, निदेशक, पीआरएल; श्री एम. गणेश पिल्लई, वैज्ञानिक सचिव, इसरो; और डॉ. तीर्थ प्रतिम दास, निदेशक, विज्ञान कार्यक्रम कार्यालय, इसरो मुख्यालय।

इस कार्यक्रम के पहले दिन, दोपहर में हुए एक विशेष सत्र के दौरान, पूर्व अध्यक्ष, इसरो / सचिव, डीओएस और अंतरिक्ष आयोग के सदस्य श्री ए.एस. किरण कुमार ने देश की चंद्र अन्वेषण यात्रा के बारे में बात करने के साथ वैज्ञानिक अवसरों की प्राथमिक पहचान करने के महत्व पर भी बल दिया, ताकि भारत के वर्ष 2040 में चंद्रमा पर मानव अवतरण मिशन से पहले की तैयारी वाले मिशनों का भी सही उपयोग किया जा सके।

वैज्ञानिक केंद्र और आवास के लिए चंद्र संरचना पर आयोजित अखिल भारतीय हैकाथॉन के विजेता छात्र (खड़े हुए), साथ में श्री ए एस किरण कुमार (पूर्व सचिव, डीओएस / अध्यक्ष, इसरो, सदस्य अंतरिक्ष आयोग, अध्यक्ष, शीर्ष विज्ञान बोर्ड, इसरो) और शिक्षा जगत व इसरो से उनके सलाहकार।

वैज्ञानिक केंद्र और आवास के लिए चंद्र संरचना पर आयोजित अखिल भारतीय हैकाथॉन के विजेता छात्र (खड़े हुए), साथ में श्री ए एस किरण कुमार (पूर्व सचिव, डीओएस / अध्यक्ष, इसरो, सदस्य अंतरिक्ष आयोग, अध्यक्ष, शीर्ष विज्ञान बोर्ड, इसरो) और शिक्षा जगत व इसरो से उनके सलाहकार।

इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय बैठक की विस्तृत कार्य-सूची में चंद्रयान-1, 2 और 3 के वैज्ञानिक योगदानों को याद करना; मिशन आयोजन और निष्पादन से मिले सीख; चंद्रयान-4 (भारत का पहला चंद्र नमूना वापसी मिशन) और चंद्रयान-5/लुपेक्स (जापानी अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा सहित किए जाने वाला भारत का चंद्र मिशन, जिसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में स्थायी रूप से छायादार रहने वाले क्षेत्र के पास हिम-जल समेत चंद्र परिवर्तनशीलों की खोज करना है), देश के शिक्षा जगत और अनुसंधान संस्थानों के साथ विचार-मंथन सत्र और नए विचारों पर छात्रों के साथ वार्तालाप हेतु एक विशेष सत्र भी शामिल है।