एनआरएससी ने भूटान के अधिकारियों के लिए जंगल की आग का पता लगाने और जले हुए क्षेत्र के मानचित्रण पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया
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जून 18, 2026

भारत-भूटान अंतरिक्ष सहयोग कार्यक्रम के अंतर्गत, राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 9-12 जून 2026 तक हैदराबाद के जेडीमेटला परिसर में "उपग्रह डेटासेट का उपयोग करके जंगल की आग का पता लगाने और जले हुए क्षेत्र का मानचित्रण" विषय पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया।

इस चार दिन के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भूटान की शाही सरकार के 11 अधिकारी शामिल हुए। ये अधिकारी कई अहम संस्थाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जिनमें वन विभाग एवं पार्क सेवा (डीओएफपीएस), प्राकृति संसाधन कॉलेज (सीएनआर), राष्ट्रीय भूमि आयोग सचिवालय (एनएलसीएस) और गॉवटेक (GovTech) एजेंसी शामिल हैं। यह कार्यक्रम भूटान की गॉवटेक एजेंसी, दूरसंचार और अतंरिक्ष प्रभाग के अनुरोध पर जंगल की आग की निगरानी, ​​आकलन और प्रबंधन के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग में राष्ट्रीय क्षमताओं को मज़बूत करने के उद्देश्य के साथ आयोजित किया गया था।

यह प्रशिक्षण उपग्रह से जंगल की आग का पता लगाने, आग से जले हुए क्षेत्र का मानचित्रण, आग की गंभीरता का आकलन और आग से निपटने की प्रचालनीय प्रणाली में तकनीकी जानकारी बढ़ाने पर केंद्रित था। इसमें शामिल लोगों ने एनआरएससी के वानिकी एवं पर्यावरण समूह (एफईजी) के वैज्ञानिकों की देखरेख में अनेक प्रकार के व्याख्यान, व्यावहारिक सत्र, डेमो और वार्तालाप सत्रों में हिस्सा लिया।

इसके मुख्य विषयों में सुदूर संवेदन के मूलभूत सिद्धांत, तापीय सुदूर संवेदन, एमओडीआईएस और वीआईआईआरएस उपग्रह डेटासेट का उपयोग करके सक्रिय आग का पता लगाना, जले हुए क्षेत्र का आकलन, जंगल की आग के विश्लेषण में एआई और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल, एवं आग की चेतावनी जारी करने व उसे प्रसारित करने वाली प्रचालनीय प्रणाली सम्मिलित थे।

इस कार्यक्रम को इसरो के केंद्रों, यथा भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस) और अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (सैक) तथा भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) के विशेषज्ञों के व्याख्यान से और बेहतर बनाया गया। इन सत्रों में आग के खतरे का श्रेणी निर्धारण, वास्तविक समय में दावानल पर निगरानी रखने के लिए भू-स्थानिक उपग्रह का उपयोग और दावानल के प्रबंधन में भारत की कार्यशैली पर चर्चा की गई।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत, प्रतिभागियों ने एनआरएससी के शादनगर परिसर का दौरा किया, जहाँ उन्हें भारत के आद्योपांत उपग्रह डेटा अभिग्रहण और संसाधन अवसंरचना के बारे में सीधी जानकारी मिली। इस दौरे में उपग्रह डेटा अभिग्रहण सुविधा, भुवन जियोपोर्टल सेवाएँ और आपातकाल प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस (एनडीईएम) का डेमो दिखाया गया, जिसमें दावानल की जानकारी तैयार करने और उसे प्रसारित करने वाली प्रचालनीय प्रणाली को प्रदर्शित किया गया।

इस कार्यक्रम ने भारतीय और भूटानी विशेषज्ञों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान हेतु एक प्रभावी मंच प्रदान किया और भारत-भूटान अंतरिक्ष सहयोग ढांचे के अंतर्गत दावानल की निगरानी और संस्थिर वन प्रबंधन के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के नए अवसरों की पहचान की।

एनआरएससी द्वारा क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन