इसरो में एलओएक्स -मीथेन इंजन का विकास
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अक्तूबर 16, 2026
इसरो में द्रव नोदन गतिविधियों की शुरुआत बहुत साधारण तरीके से हुई थी—इसमें एसएलवी-3 के लिए लघु प्रणोदक और द्वितीयक अंतःक्षेपण प्रणोद सदिश नियंत्रक (एसआईटीवीसी) प्रणाली का विकास और आपूर्ति शामिल थी, और इसके पश्चात एएसएलवी के लिए भी इसी तरह की नियंत्रक प्रणाली की आपूर्ति की गई। द्रव नोदन के क्षेत्र में एक दीर्घ छलांग तब आई जब पीएसएलवी के लिए 800केएन विकास इंजन को सहकार्य से विकसित किया गया। आज यह इसरो का मुख्य द्रव इंजन है, जिसका उपयोग पीएसएलवी, जीएसएलवी और एलवीएम3 में किया जाता है। इसके बाद, भारत ने जीएसएलवी और एलवीएम3 प्रमोचन यानों के लिए स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन और चरण को विकसित करके, अत्यंत महत्वपूर्ण क्रायोजेनिक नोदन में महारत हासिल की, जिससे देश संचार उपग्रहों को प्रमोचित करने के मामले में आत्मनिर्भर बन गया। इसी तरह, उपग्रह के क्षेत्र में, इसरो ने एकल नोदक के विकास और आपूर्ति से शुरुआत कर इनसैट संचार उपग्रहों के लिए आवश्यक द्विप्रणोदक द्रव अपभू मोटरों (एलएएम) की ओर कदम बढ़ाया। इसरो ने चंद्रयान-3 लैंडर मिशन के लिए उपरोधनीय नोदन प्रणाली भी विकसित की, जिसकी मदद से भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास अंतरिक्ष यान उतारने वाला दुनिया का पहला देश बन गया।
द्रव नोदन प्रणालियों में स्वच्छ दहन, कम रखरखाव (पुन:उपयोग योग्य) और मंगल ग्रह पर कार्बन डाइऑक्साइड और बर्फीले पानी से संश्लेषित किए जाने की क्षमता (भविष्य के मंगल मिशनों और मानव उपनिवेशन के लिए उपयोगी) को देखते हुए, वैश्विक स्तर पर एलओएक्स-मीथेन इंजनों की ओर रुझान देखा जा रहा है। इस संदर्भ में, इसरो ने भी एलओएक्स-मीथेन इंजनों को अपनी अगली पीढ़ी के प्रमोचन यान (एनजीएलवी) और 2040 में लक्षित भारतीय कर्मीदल सहित चंद्र अवतरण मिशन के लिए आवश्यक भविष्य के भारी उत्थापन वाले प्रमोचन यान की प्राथमिक नोदन प्रणालियों के रूप में चुना है।
भविष्य के प्रमोचन यानों में एलओएक्स-मीथेन नोदन प्रणाली की संभावनाओं को देखते हुए, इसरो ने वर्ष 2019 में इस क्षेत्र में विकास कार्य शुरू किए, जिससे इंजन के प्रचालन पर द्रव ऑक्सीजन-द्रव मीथेन (एलओएक्स -मीथेन) नोदक संयोजन के महत्वपूर्ण पहलुओं को समझा जा सके। 2019-2020 के दौरान, मौजूदा सीई-20 एलओएक्स/एलएच2 क्रायोजेनिक इंजन उपप्रणाली का उपयोग करके 20-टन प्रणोद वाले एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक इंजन (जिसे एलएम20-टीडी इंजन नाम दिया गया है) का विकास कर परीक्षण किया गया। सीई20 इंजन को प्रदर्शक इंजन में बदलने के लिए नोदक प्रवाह नियंत्रण प्रणाली और इंजन स्टार्ट-अप प्रणाली में आवश्यक परिवर्तन किए गए। यह प्रदर्शक इंजन गैस उत्पादन चक्र पर काम करता है। इसकी मुख्य उप-प्रणालियों में प्रणोद कक्ष, ईंधन-युक्त गैस उत्पादन, ईंधन टर्बोपंप, एलओएक्स टर्बोपंप, प्रज्वालक, स्टार्ट-अप प्रणाली , नियंत्रक घटक, प्रवाह नियंत्रण तत्व और विद्युत ड्राइव वाला मिश्रण अनुपात नियंत्रक वाल्व शामिल हैं। विकास परीक्षणों से पहले, सैद्धांतिक विश्लेषण के माध्यम से सभी उप-प्रणालियों के डिज़ाइन की उपयुक्तता का मूल्यांकन किया गया था। परीक्षणों का क्रम, स्वदेशी रूप से विकसित एक गणितीय मॉडल का उपयोग करके निर्धारित किया गया था।
आईपीआरसी में उपलब्ध क्रायोजेनिक इंजन परीक्षण सुविधा को एलएम20 प्रदर्शक इंजन के परीक्षण के लिए उन्नत किया गया था, जिसके अंतर्गत एक शीत प्रवाह परीक्षण और पांच तप्त परीक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न किए गए। इन परीक्षणों से मिले डेटा के आधार पर, एलओएक्स-मीथेन इंजन के लिए शीतलता वाली विशेषताओं, प्रणोद कक्ष और गैस उत्पादन प्रज्वलन, इंजन शुरू होने की प्रक्रिया, दहन और रोटर-डायनामिक प्रणाली के प्रदर्शन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।
प्रौद्योगिकी प्रदर्शक इंजन से प्राप्त जानकारियों का लाभ उठाते हुए, इसरो में विकसित किए जा रहे एलओएक्स-मीथेन इंजन के डिज़ाइन में उनका प्रभावी ढंग से उपयोग किया गया है।
आईपीआरसी में प्रौद्योगिकी प्रदर्शक इंजन (एलएमडी-टीडी) का तप्त परीक्षण
वर्ष 2023 में, इसरो ने 1100केएन एलओएक्स -मीथेन इंजन (एलएमई1100) के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों के विकास की औपचारिक शुरुआत की। इसमें इंजन की विभिन्न उप-प्रणालियों, यथा टर्बोपंप, प्रज्वालक, गैस उत्पादक और प्रणोद कक्ष से जुड़ी मुख्य तकनीकों के विकास और सत्यापन पर ध्यान केंद्रित किया गया।
एलएमई1100 इंजन को गैस उत्पादक चक्र (जीजीसी) पर आधारित इंजन के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिसमें इसे उद्योगों के लिए सुविधाजनक और किफायती बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। देश भर के औद्योगिक साझेदारों की सक्रिय भागीदारी से, एलएमई1100 इंजन के 70% से अधिक पुर्ज़े संयोजी विनिर्माण तकनीक के माध्यम से तैयार किए गए हैं।
गैस उत्पादक (जीजी) को संयोजी विनिर्माण के माध्यम से तैयार किया गया है और अभी आईपीआरसी में इसकी अर्हता जांच चल रही है। स्पार्क टॉर्च प्रज्वालक का उपयोग करके प्रज्वलन क्रम तय करने और प्रज्वलन के दौरान संयोजी विनिर्माण से बने अंतःक्षेपक तत्वों की विशेषताओं को समझने के लिए, प्रयोगशाला स्तर पर इसके छोटे वर्ज़न का व्यापक परीक्षण किया गया। 9 अक्टूबर 2026 को पूर्ण पैमाना गैस उत्पादक का पहला प्रज्वलन परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया। अलग-अलग स्थितियों में इसके प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए इसी प्रकार के अनेक परीक्षण करने की योजना है।
उप-पैमाना जीजी तप्त परीक्षण
पूर्ण पैमाने का जीजी शीत प्रवाह परीक्षण
उप-पैमाना प्रणोद कक्ष का तप्त परीक्षण अभियान भी चलाया गया। इस परीक्षण शृंखला का उद्देश्य उन नई निर्माण तकनीकों को प्रदर्शित करना था, जिन्हें आगे चलकर पूर्ण-पैमाना प्रणोद कक्ष में अपनाया जाना है। इस तप्त परीक्षण अभियान का उपयोग एलएई1100 प्रणोद कक्ष के लिए डिज़ाइन किए गए अंतःक्षेपक तत्वों को, अलग-अलग डिज़ाइन और प्रचालनशील मापदंडों के अंतर्गत, वास्तविक प्रचालन स्थितियों में परखने के लिए भी किया गया। आईपीआरसी में चलाए गए इस टपर परीक्षण अभियान से न केवल सबसे उपयुक्त अंतःक्षेपक संरूपण को अंतिम रूप देने में मदद मिली, बल्कि इसने ऑक्सीडाइज़र-समृद्ध और ईंधन-समृद्ध स्पार्क टॉर्च प्रज्वालकों की कार्यप्रणाली को प्रदर्शित करने में भी सहायता की।
उप-पैमाना प्रणोद कक्ष तप्त परीक्षण
एलओएक्स और मीथेन टर्बो-पंप प्रणाली को देश भर के विभिन्न उद्योगों के माध्यम से तैयार किया गया है, और इनके हार्डवेयर का एलपीएससी और आईपीआरसी में विभिन्न स्तरों पर उप-प्रणाली परीक्षण चल रहा है। एलपीएससी में 3डी प्रिंटेड एलओएक्स पंप आवेजक का उसकी निर्धारित प्रचालन गति तक प्रचक्रण परीक्षण किया गया। गतिशील पारीबंधन प्रणाली और टर्बो-पंप बेयरिंग भी भारतीय उद्योगों द्वारा तैयार किए गए हैं और इनकी एलपीएससी तथा आईपीआरसी में अर्हता जांच चल रही है। आईपीआरसी में समेकित टर्बो-पंप प्रणाली की शीत प्रवाह विशिष्टता निर्धारण का काम चल रहा है।
एलओएक्स शीत प्रवाह सुविधा और प्रचक्रण परीक्षण सुविधा में एलओएक्स टर्बो पंप
उप-प्रणाली परीक्षण की शुरुआत जीओएक्स-जीसीएच4 आधारित स्पार्क टॉर्च प्रज्वालक के प्रज्वलन परीक्षण और व्यापक परीक्षणों के साथ हुई। स्पार्क टॉर्च प्रज्वालक के ऑक्सीडाइज़र-समृद्ध और ईंधन-समृद्ध दोनों संस्करण विकसित किए गए और उनका सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। इसके अलावा, एलपीएससी ने वीएसएससी और भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएसटी) के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर-आधारित स्पार्क प्लग का उपयोग करने वाला एक प्रज्वालक भी विकसित किया। एलपीएससी में लेज़र-आधारित प्रज्वलन प्रणाली भी विकसित की गई है, जिसका उपयोग जीओएक्स-जीएच2 और जीओएक्स-जीसीएच4 नोदक संयोजनों को प्रज्वलित करने में सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
स्पार्क टॉर्च प्रज्वालक तप्त परीक्षण
लेज़र प्रज्वालक तप्त परीक्षण
समेकित एलएमई1100 इंजन को आगामी वर्ष के मध्य तक तैयार करने का लक्ष्य है और इसे विभिन्न प्रणोद उपरोधन प्रोफाइल सहित निर्धारित प्रचालन स्थितियों के लिए योग्य बनाने के लिए अनेक तप्त परीक्षण किए जाएंगे। इसके साथ ही, 2400केएन एलओएक्स-मीथेन इंजन के विकास से जुड़े डिज़ाइन का काम भी पूरा हो चुका है, जो पूर्ण प्रवाह चरण दहन चक्र (एफएफएससीसी) पर आधारित है। यह 2400केएन इंजन भविष्य में चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने के लिए एक भारी उत्थापन मानव अनुकूलित प्रमोचन यान विकसित करने में मदद करेगा।
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