22 सितंबर, 2026
अध्यक्ष, इसरो /सचिव, अंतरिक्ष विभाग ने 5-9 अक्टूबर, 2026 के दौरान तुर्की के अंताल्या में आयोजित 77वें आईएसी में भाग लिया। इस कार्यक्रम का आयोजन अंतरराष्ट्रीय एस्ट्रोनॉटिकल फेडरेशन (आईएएफ) द्वारा किया गया था और इसकी मेजबानी तुर्की अंतरिक्ष एजेंसी (टीयूए) ने की थी। इसके भाग के रूप में, अध्यक्ष, इसरो /सचिव, अंतरिक्ष विभाग ने 4 अक्तूबर, 2026 को अंतरराष्ट्रीय एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स (आईएए) के एकेडमी डे कार्यक्रम और आईएए बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में भी भाग लिया।
आईएसी में, अध्यक्ष, इसरो/सचिव, अंतरिक्ष विभाग ने उद्घाटन दिवस पर आयोजित 'वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों के साथ आमने-सामने साक्षात्कार' नामक उच्च स्तरीय पूर्ण पैनल में भाग लिया और सभी के लिए अंतरिक्ष लाभ, इसरो के अंतरिक्ष स्थिरता संबंधी प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग पर विचारों पर संचालक द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दिया।
वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों के साथ साक्षात्कार
आईएसी में, इसरो, इन-स्पेस और एनसिल ने संयुक्त रूप से आईएसी प्रदर्शनी के तहत भारतीय अंतरिक्ष पैवेलियन स्थापित किया। इस पैवेलियन के माध्यम से, भारत की 10 अंतरिक्ष कंपनियों/स्टार्ट-अप्स को अपनी विशेषज्ञता प्रदर्शित करने का अवसर दिया गया।
आईएसी 2026 प्रदर्शनी में भारतीय पैवेलियन
आईएसी में प्रदर्शनी का उद्घाटन
5 अक्तूबर 2026 को 'आईएएफ अंतरिक्ष अग्रणियों के बैठक' में, अध्यक्ष, इसरो/सचिव, अंतरिक्ष विभाग ने पृथ्वी की चुनौतियों और आपदाओं के न्यूनीकरण में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की भारत की कोशिशों पर प्रकाश डाला।
आईएएफ वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की बैठक
अध्यक्ष, इसरो/ सचिव, अंतरिक्ष विभाग ने आर्टेमिस एकॉर्ड्स के प्रमुखों की बैठक में भाग लिया। उन्होंने इस बात पर अपने विचार साझा किए कि कैसे आर्टेमिस समझौते में शामिल देश, उभरते हुए अंतरिक्ष राष्ट्रों की क्षमताएं विकसित करने में मदद कर सकते हैं। साथ ही, उन्होंने आर्टेमिस समझौते से जुड़ी चर्चाओं को यूएनसीओपीयूओएस जैसे संबंधित बहुपक्षीय मंचों तक ले जाने के बारे में भी बात की।
आर्टेमिस एकॉर्ड्स के प्रमुखों की बैठक
अध्यक्ष, इसरो/सचिव, अंतरिक्ष विभाग ने नासा (अमेरिका), ईएसए (यूरोप), सीएनईएस (फ्रांस), एएसआई (इटली), एएसए (ऑस्ट्रेलिया), सीएसए (कनाडा), यूकेएसए (यूनाइटेड किंगडम), सीओएनएई (अर्जेंटीना), जाक्सा (जापान), एनएलएसए (नीदरलैंड) और उज्बेकिस्तान अंतरिक्ष एजेंसी जैसी अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकों के साथ ही, कुछ अंतरिक्ष उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा की। इन द्विपक्षीय बैठकों में मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, चंद्र अन्वेषण, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत हुई। इन-स्पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका भी इन बैठकों में शामिल हुए और उन्होंने उभरते निजी अंतरिक्ष परितंत्र तथा उद्योग स्तर पर सहयोग के अवसरों के बारे में जानकारी साझा की।
जाक्सा के अध्यक्ष के साथ बैठक
ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी के प्रमुख के साथ बैठक
इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी के विशेष आयुक्त के साथ बैठक
नासा, अमेरिका के उप-प्रशासक के साथ बैठक
यूके अंतरिक्ष एजेंसी के निदेशक के साथ बैठक
कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के अध्यक्ष के साथ बैठक
फ्रांस के सीएनईएस अध्यक्ष के साथ बैठक
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के महानिदेशक के साथ बैठक
अर्जेंटीना अंतरिक्ष एजेंसी के कार्यकारी और तकनीकी निदेशक के साथ बैठक
उज़्बेकिस्तान अंतरिक्ष एजेंसी के महानिदेशक के साथ बैठक
नीदरलैंड्स अंतरिक्ष एजेंसी के निदेशक के साथ बैठक
6 अक्तूबर 2026 को, इन-स्पेस द्वारा (तुर्की में भारतीय मिशन के सहयोग से) उभरते भारतीय अंतरिक्ष परितंत्र पर आयोजित 'नेटवर्किंग रिसेप्शन' में अध्यक्ष, इसरो /सचिव, अंतरिक्ष विभाग ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। इन-स्पेस के अध्यक्ष और तुर्की में भारत के राजदूत ने भी इस कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित किया।
नेटवर्किंग रिसेप्शन
इसरो/अंतरिक्ष विभाग प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने विभिन्न सत्रों में भाग लिया, जिनमें पूर्ण सत्र, मुख्य व्याख्यान, वैश्विक नेटवर्किंग फोरम और समानांतर तकनीकी सत्र शामिल थे। इसके अलावा, उन्होंने प्रदर्शनी का दौरा किया और विषय विशेषज्ञों के साथ बातचीत की।
संपूर्णतः, इस कार्यक्रम में अंतरिक्ष विभाग के प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी सफल रही और विभिन्न स्तरों (सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत, छात्र) पर वैश्विक हितधारकों के साथ हुई चर्चा सार्थक रही। इस अवसर का उपयोग अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों और एक मजबूत अंतरिक्ष परितंत्र बनाने के लिए हमारी सरकार के सफल प्रयासों को उजागर करने के लिए किया गया। साथ ही, अंतरिक्ष -2047 विजन के प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों में अन्य देशों की अंतरिक्ष संस्थाओं से साझेदारी और योगदान की संभावनाएं भी तलाशी गईं।