भारत का अंतरिक्ष धूलि प्रयोग – अंतरग्रहीय रहस्यों की अभूतपूर्व खोज!
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05 जनवरी, 2026

अंतरग्रहीय धूल कण (आईडीपी) धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों से निकले सूक्ष्म कण होते हैं, जो हमारे वायुमंडल की रहस्यमयी “उल्का परत” का निर्माण करते हैं और रात को “टूटते तारे” के रूप में दिखाई देते हैं। धूलि प्रयोग (डीईएक्स) ऐसे उच्च-वेग वाले आईडीपी की खोज के लिए विकसित किया गया पहला भारतीय उपकरण है। यह संहत उपकरण संघट्टों को “सुनने” के लिए विशेष रूप से संवेदित किया गया है, जो ब्रह्मांड के प्रति हमारी समझ को नया आयाम देने के लिए महत्वपूर्ण आँकड़े ग्रहण करते हैं और सुरक्षित मानव गहन-अंतरिक्ष अभियानों का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इस प्रयोग के केंद्र में अत्याधुनिक अति-वेग सिद्धांत पर आधारित 3 किलोग्राम वज़न का धूल संसूचक है, जिसे मात्र 4.5 वॉट ऊर्जा खपत के साथ उच्च-गति अंतरिक्ष धूल कणों के प्रभावों को दर्ज करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

अंतरग्रहीय धूल कण (आईडीपी) धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों से निकले सूक्ष्म कण होते हैं, जो हमारे वायुमंडल की रहस्यमयी “उल्का परत” का निर्माण करते हैं और रात को “टूटते तारे” के रूप में दिखाई देते हैं। धूलि प्रयोग (डीईएक्स) ऐसे उच्च-वेग वाले आईडीपी की खोज के लिए विकसित किया गया पहला भारतीय उपकरण है। यह संहत उपकरण संघट्टों को “सुनने” के लिए विशेष रूप से संवेदित किया गया है, जो ब्रह्मांड के प्रति हमारी समझ को नया आयाम देने के लिए महत्वपूर्ण आँकड़े ग्रहण करते हैं और सुरक्षित मानव गहन-अंतरिक्ष अभियानों का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इस प्रयोग के केंद्र में अत्याधुनिक अति-वेग सिद्धांत पर आधारित 3 किलोग्राम वज़न का धूल संसूचक है, जिसे मात्र 4.5 वॉट ऊर्जा खपत के साथ उच्च-गति अंतरिक्ष धूल कणों के प्रभावों को दर्ज करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

India’s Cosmic Dust Experiment - Ground-breaking Hunt for Interplanetary Secrets!

चित्र 1: पीएसएलवी-सी58 एक्स्पोसैट मिशन के पीओईएम पर स्थापित डीईएक्स का उड़ान मॉडल

India’s Cosmic Dust Experiment - Ground-breaking Hunt for Interplanetary Secrets!

चित्र 2: 14 जनवरी 2024 को कक्षा संख्या 207 से संबंधित डीईएक्स द्वारा प्राप्त विशेष धूल संघट्ट संकेत। एक्स-अक्ष पर समय की इकाई माइक्रो-सेकंड में है।

डीईएक्स ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने वाले अंतरग्रहीय धूल कणों के नवीनतम प्रेक्षण प्रदान किए हैं। 6.5 × 10⁻³ कण मी-2 सेकंड-1 (परास: 3×10−3 से 1×10−2) के धूल फ्लक्स के निर्णायक मापनों (चित्र-3) ने बाह्य अंतरिक्ष से होने वाली निरंतर बौछार की रोमांचक पुष्टि की है।

India’s Cosmic Dust Experiment - Ground-breaking Hunt for Interplanetary Secrets!

चित्र 3: डीईएक्स मापन से प्राप्त फ्लक्स, जिसे Grün et al. (1985) के फ्लक्स मॉडल के साथ प्रदर्शित किया गया है।

वर्तमान में हमारे पास शुक्र के सघन वायुमंडल या लाल ग्रह मंगल के विरल वायुमंडल में ब्रह्मांडीय धूल के कोई मापन उपलब्ध नहीं हैं। डीईएक्स एक ऐसे संसूचक का ब्लूप्रिंट है, जो वायुमंडल वाले अथवा बिना वायुमंडल वाले किसी भी ग्रह पर ब्रह्मांडीय धूल कणों का अध्ययन कर सकता है। पृथ्वी की कक्षा में परिक्रमा कर रहे डीईएक्स की सिद्ध सफलता, शुक्र या मंगल जैसे अब तक अन्वेषित वायुमंडलों में आईडीपी के प्रथम प्रत्यक्ष मापन उपलब्ध करा सकती है, साथ ही चंद्रमा के आसपास भी नए मापन प्रदान कर सकती है। शुद्ध विज्ञान से परे, यह डेटा मिशन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आईडीपी का मापन करने की क्षमता अंतरिक्ष पर्यावरण की निगरानी, हमारे उपग्रहों के लिए जोखिमों का सटीक आकलन तथा अंततः चंद्रमा, मंगल और उससे आगे की भविष्य की मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशनों की सुरक्षा और सफलता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

अंतरिक्ष धूलि संसूचक, धूलि प्रयोग (डीईएक्स), का विकास भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), अहमदाबाद द्वारा किया गया है।

संदर्भ: Pabari et al. (2025), शुक्र कक्षीय धूलि प्रयोग के संदर्भ में निकट-पृथ्वी कक्षा में डीईएक्स, वैज्ञानिक रिपोर्ट, नेचर पोर्टफोलियो, 15, 38168. DOI: https://doi.org/10.1038/s41598-025-21988-2