16 अप्रैल, 2026
8 अप्रैल, 2026 को बेंगलूरु में आयोजित अंतरिक्ष यान मिशन प्रचालन केद्वितीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (एसएमओपीएस-2026) के उद्घाटन सत्र में अध्यक्ष, इसरो / सचिव, अंतरिक्ष विभाग, डॉ. वी. नारायणन द्वारा भारतीय अंतरिक्ष स्थिति निर्धारण रिपोर्ट 2025 (आईएसएसएआर-2025) जारी किया गया। आईएसएसएआर-2025 का कार्यकारी सारांश निम्नानुसार है।
पृष्ठभूमि
सुरक्षित एवं संधारणीय अंतरिक्ष प्रचालन प्रबंधन हेतु इसरो प्रणाली (आईएस4ओएम) विभिन्न अंतरिक्ष पर्यावरणीय खतरों से राष्ट्रीय अंतरिक्ष परिसंपत्तियों को सुरक्षित रखने हेतु अंतरिक्ष स्थिति निर्धारण (एसएसए) गतिविधियों सहित सभीअंतरिक्ष संधारणीय प्रयासों को संगठित करने और बाह्य अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता के आधार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त दिशानिर्देशों के अनुपालन में सुधार करने के लिए नोडल इकाई के रूप में कार्य करती है। इन गतिविधियों के एक अभिन्न अंग के रूप में, प्रासंगिक हितधारकों को जानकारी देने हेतु भारतीय अंतरिक्ष स्थिति निर्धारण रिपोर्ट (आईएसएसएआर) के रूप में मौजूदा अंतरिक्ष स्थिति का वार्षिक निर्धारण संकलित किया गया है। आईएसएसएआर-2025 की मुख्य बातें निम्नानुसार हैं।
वैश्विक परिदृश्य
Figure 1 Cumulative growth of space objects (data source: Space-Track catalogue, History of On-Orbit Satellite Fragmentations published by NASA)
Figure 2: Number of catalogued objectslaunched in orbit and re-entered the atmosphere on each day from 1st January to 31st December2025 (data source: Space-Track)
वर्ष 2025 के अंत तक भारतीय अंतरिक्ष परिदृश्य
भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत से लेकर वर्ष 2025 के अंत तक सभी भारतीय अंतरिक्ष पिंडों की अंतरिक्ष स्थिति का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:
वर्ष 2025 के दौरान भारतीय वस्तुओंकी अंतरिक्ष में स्थिति
सीओएलए की सिफारिश के आधार पर एलवीएम3 एम6 मिशन का प्रमोचन 41 सेकंड के लिए विलंबित हुआ।
Figure 3: Cumulative number of CAMs performed since 2011
अंतरिक्ष स्थिरता को संरक्षित करने के प्रयास
बेंगलूरु में आयोजित आईएडीसी की 42वीं वार्षिक बैठक के प्लेनरी सत्र के दौरान, वर्ष 2024 में घोषित किए गए मलबा रहित अंतरिक्ष मिशन (डीएफएसएम) के उद्देश्यों को पूरा करने के प्रयास जारी रखे गए। डीएफएसएम का लक्ष्य वर्ष 2030 तक सभी भारतीय अंतरिक्ष भागीदारों, सरकारी या गैर-सरकारी, द्वारा मलबे रहित अंतरिक्ष मिशनों को पूरा करना है। इसके लिए डिजाइन, प्रचालन और निपटान चरणों के दौरान लियो उपग्रहों की मिशन के बाद कक्षा से बाहर निकलने की क्षमता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त ईंधन का आवंटन करना जैसे आवश्यक उपाय अपनाए जाएंगे।
अंतरिक्ष वस्तुओं का अनुवर्तन और विश्लेषण (नेत्रा) परियोजना के माध्यम से स्वदेशी अंतरिक्ष वस्तु अनुवर्तन (एसएसए) क्षमता निर्माण के अंतर्गत, लद्दाख के हानले में एक प्रकाशीय टेलीस्कोप की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। एक राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ समिति द्वारा वर्ष 2025 में स्वदेशी चरणबद्ध सरणी अंतरिक्ष पिंड अनुवर्तन रडार के डिज़ाइन और समीक्षा का कार्य पूरा किया गया। भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्वदेशी रूप से विकसित रडार स्थापित करने के प्रयास जारी हैं। श्रीहरिकोटा स्थित बहु-पिंड अनुवर्तन रडार (एमओटीआर) वर्तमान में भारतीय रॉकेट निकायों और पीओईएम-4 जैसे उपग्रहों सहित अंतरिक्ष वस्तुओं का वायुमंडल में पुनः प्रवेश से पहले उनकी अंतिम कुछ कक्षाओं के दौरान, जहाँ भी संभव हो, अनुवर्तन करता है। एआरआईईएस के सहयोग से नैनीताल में वर्तमान में नवीनीकृत हो रही बेकर नन श्मिट टेलीस्कोप (बीएनएसटी) से भी निकट भविष्य में अंतरिक्ष वस्तु अनुवर्तन क्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है।
भारत अंतरिक्ष मलबे से संबंधित चर्चाओं में अंतर-एजेंसी अंतरिक्ष मलबा समन्वय समिति (आईएडीसी), आईएए अंतरिक्ष मलबा समिति, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष महासंघ (आईएएफ) एसटीएम समिति, आईएसओ कार्य समूह 7 और दीर्घकालिक स्थिरता पर संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह जैसे अंतरारक्षत्रीय मंचों पर सक्रिय रूप से भाग लेता है और प्रासंगिक सुझाव प्रदान करता है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के साथ समन्वय में, इसरो अंतरिक्ष उड़ान सुरक्षा से संबंधित सर्वोत्तम प्रथाओं के लिए निजी संस्थाओं के साथ सहयोग और अनुभव साझा करने के लिए जुड़ा हुआ है।
बाह्य अंतरिक्ष गतिविधियों की निरन्तरता के संरक्षण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के तहत, इसरो डीएफएसएम के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अंतरिक्ष मलबे को कम करने के उपायों को सक्रिय रूप से लागू करना जारी रखेगा और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संबंधित हितधारकों के साथ सहयोग करेगा।