वर्ष 2025 के लिए भारतीय अंतरिक्ष स्थिति निर्धारण रिपोर्ट (आईएसएसएआर) जारी की गई
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16 अप्रैल, 2026

8 अप्रैल, 2026 को बेंगलूरु में आयोजित अंतरिक्ष यान मिशन प्रचालन केद्वितीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (एसएमओपीएस-2026) के उद्घाटन सत्र में अध्यक्ष, इसरो / सचिव, अंतरिक्ष विभाग, डॉ. वी. नारायणन द्वारा भारतीय अंतरिक्ष स्थिति निर्धारण रिपोर्ट 2025 (आईएसएसएआर-2025) जारी किया गया। आईएसएसएआर-2025 का कार्यकारी सारांश निम्नानुसार है।

वर्ष 2025 के लिए भारतीय अंतरिक्ष स्थिति निर्धारण रिपोर्ट (आईएसएसएआर) जारी की गई

पृष्ठभूमि

सुरक्षित एवं संधारणीय अंतरिक्ष प्रचालन प्रबंधन हेतु इसरो प्रणाली (आईएस4ओएम) विभिन्न अंतरिक्ष पर्यावरणीय खतरों से राष्ट्रीय अंतरिक्ष परिसंपत्तियों को सुरक्षित रखने हेतु अंतरिक्ष स्थिति निर्धारण (एसएसए) गतिविधियों सहित सभीअंतरिक्ष संधारणीय प्रयासों को संगठित करने और बाह्य अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता के आधार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त दिशानिर्देशों के अनुपालन में सुधार करने के लिए नोडल इकाई के रूप में कार्य करती है। इन गतिविधियों के एक अभिन्न अंग के रूप में, प्रासंगिक हितधारकों को जानकारी देने हेतु भारतीय अंतरिक्ष स्थिति निर्धारण रिपोर्ट (आईएसएसएआर) के रूप में मौजूदा अंतरिक्ष स्थिति का वार्षिक निर्धारण संकलित किया गया है। आईएसएसएआर-2025 की मुख्य बातें निम्नानुसार हैं।

वैश्विक परिदृश्य

  • अंतरिक्ष युग की शुरुआत के बाद, वर्ष 2025 में सबसे अधिक प्रमोचन हुए। कुल 328 प्रमोचन प्रयास किए गए, जिनमें से 315 प्रमोचनों से 4198 ज्ञात प्रचालनात्मक उपग्रह स्थापित करने में सफलता प्राप्त हुई। इस वर्ष अंतरिक्ष वस्तुओं की संख्या में 4651 वस्तुएं जोड़ी गईं, जो पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है – वर्ष 2024 में 254 प्रमोचनों से अंतरिक्ष वस्तुओं की संख्या में 2963 वस्तुओं की वृद्धि हुई और वर्ष 2023 में 212 प्रमोचनों से 3135 वस्तुओं की वृद्धि हुई। वर्ष 2025 के अंत तक अंतरिक्ष वस्तुओं की संचयी वृद्धि चित्र 1 में दर्शाई गई है।
    Cumulative growth of space objects (data source: Space-Track catalogue, History of On-Orbit Satellite Fragmentations published by NASA)

    Figure 1 Cumulative growth of space objects (data source: Space-Track catalogue, History of On-Orbit Satellite Fragmentations published by NASA)

  • चित्र 2 में दिखाई देने वाली अंतरिक्ष वस्तुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि, परिवाहक साझा-सवारी प्रमोचन (परिवाहक 12, 13, 14 और 15 मिशन क्रमशः 14 जनवरी, 15 मार्च, 2 जून और 28 नवंबर को) से संबंधित है, जिसमें 70 से अधिक नीतभार जोड़े गए, जिनमें से सबसे अधिक 28 नवंबर को 140 नीतभार थे। 50 से अधिक वस्तुओं वाली वृद्धि को स्टारलिंक उपग्रहों के दो बैचों के एक साथ प्रमोचन या स्टारलिंक और कुइपर बैचों के एक ही दिन प्रमोचन होने से जोड़ा जा सकता है। 28 अप्रैल 2025 को 3 अलग-अलग तारामंडलों के उपग्रहों का प्रमोचन भी एक साथ हुआ, अर्थात् स्टारलिंक उपग्रहों के दो बैच (50 वस्तुएं), कुइपर का एक बैच (27 वस्तुएं) और हुइलानवांग का एक बैच (10 वस्तुएं)। सोयुज-2.1बी प्रमोचन यान ने भी 28 दिसंबर 2025 को 52 नीतभार अंतरिक्ष में भेजे।
    Number of catalogued objectslaunched in orbit and re-entered the atmosphere on each day from 1st January to 31st December2025

    Figure 2: Number of catalogued objectslaunched in orbit and re-entered the atmosphere on each day from 1st January to 31st December2025 (data source: Space-Track)

  • कुल 1911 सूचीबद्ध वस्तुओं ने वायुमंडल में पुनः प्रवेश किया। वायुमंडल में पुनः प्रवेश करने वाली वस्तुओं की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में कम है। वर्ष 2024 में पुनः प्रवेश की अधिक संख्या का कारण स्टारलिंक उपग्रहों का बड़े पैमाने पर कक्षा से बाहर निकलना और सौर गतिविधि की तीव्रता में वृद्धि हो सकती है। वर्ष 2025 में पुनः प्रवेश करने वाली वस्तुओं में से 1002 ज्ञात अंतरिक्ष यान थे, 657 मलबा वस्तुएं थीं, 108 रॉकेट के पिंड थे और 144 अज्ञात प्रकृति की थीं।
  • 10749 स्टारलिंक उपग्रहों में से, 9396 उपग्रह अभी भी कक्षा में थे और 1353 उपग्रह वर्ष 2025 के अंत तक पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर चुके थे। इसके अतिरिक्त, हुलियानवांगडिगुई, कुइपर और यूएसए-एनआरओ (राष्ट्रीय सर्वेक्षण कार्यालय) जैसे उपग्रह समूहों ने वर्ष 2025 में क्रमशः 136, 180 और 99 उपग्रहों को प्रमोचित किया।
  • वर्ष 2025 में किसी भी बड़े कक्षीय विखंडन की घटना की सूचना नहीं मिली (आमतौर पर 20 से अधिक सूचीबद्ध टुकड़ों को उत्पन्न करने वाली घटनाओं को बड़ी घटना माना जाता है)।
  • वर्ष 2025 में चार चंद्र मिशन प्रमोचित किए गए, जो चंद्र अन्वेषण में बढ़ती रुचि को दर्शाते हैं। ये सभी मिशन निजी कंपनियों द्वारा प्रमोचित किए गए थे। इनमें से, ब्लू घोस्ट मिशन 1 इतिहास रचते हुए चंद्रमा पर सफलतापूर्वक मृदु अवतरण करने वाला पहला निजी स्वामित्व वाला अंतरिक्ष यान बन गया।
  • इस अवधि में वायुमंडल में पुनः प्रवेश करने के बाद बचे मलबे की उल्लेखनीय भू प्रभावी घटनाओं में 19 फरवरी को पोलैंड के ऊपर पुनः प्रवेश करने वाले फाल्कन-9 के द्वितीय चरण का मलबा, 24 मार्च को सहारा रेगिस्तान के चेक गणराज्य क्षेत्र में बरामद क्रू-9 ड्रैगन ट्रंक और 10 मई को अर्जेंटीना के सांता फ़े में कई कंपोजिट ओवररैप्ड प्रेशर वेसल्स (सीओपी) शामिल हैं। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली। कोसमोस 954, शुक्र ग्रह का एक असफल प्रमोचन, जो प्रमोचन के 53 वर्ष बाद 10 मई, 2025 को पृथ्वी पर वापस आते हुए हिंद महासागर के ऊपर टकराया, वह भी पुनः प्रवेश में सुरक्षित रहा।
  • तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन के लिए चीनी मानव अंतरिक्ष मिशन के शेनझोउ-20 अंतरिक्ष यान की एक खिड़की में कथित तौर पर एक सूक्ष्म उल्कापिंड के टकराने से दरार आ गई। इस क्षति का पता 5 नवंबर 2025 को चला, जिसके कारण तीन सदस्यीय दल की वापसी में देरी हुई और अंततः उन्हें बाद में किसी अन्य अंतरिक्ष यान से लौटना पड़ा।
  • वर्ष 2025 के समेकित आंकड़े अंतरिक्ष गतिविधियों में आई तेजी को दर्शाते हैं, जिसका प्रमाण प्रमोचनों की अधिकतम संख्या से मिलता है। अंतरिक्ष वस्तुओं की संख्या में वृद्धि का रुझान जारी रहा।
  • निकट संपर्क संबंधी चेतावनियों की भारी संख्या (~1,60,000) अंतरिक्ष में, विशेष रूप से निम्न-भू कक्षा में, व्याप्त भीड़भाड़ को दर्शाती है। कई बड़े उपग्रह समूहों की प्रस्तावित तैनाती से एक ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है जहां वर्तमान दशक के भीतर सक्रिय उपग्रहों की संख्या अंतरिक्ष मलबे से अधिक हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप अंतरिक्ष यातायात समन्वय का बोझ बढ़ जाएगा।
  • सौर चक्र 25 के चरम (जो 2024 के अंत में शुरू हुआ और 2025 के आरंभ तक चला) के दौरान सौर गतिविधियाँ उच्च थीं, जैसा कि कई मध्यम से गंभीर भूचुंबकीय तूफानों से संकेत मिलता है। इसके प्रभाव वर्ष की शुरुआत में कक्षीय क्षय की उच्च दर और पुनः प्रवेश की अधिक संख्या में परिलक्षित हुए।

वर्ष 2025 के अंत तक भारतीय अंतरिक्ष परिदृश्य

भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत से लेकर वर्ष 2025 के अंत तक सभी भारतीय अंतरिक्ष पिंडों की अंतरिक्ष स्थिति का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:

  • वर्ष 2025 के अंत तक, निजी प्रचालकों/शैक्षणिक संस्थानों सहित कुल 144 भारतीय अंतरिक्ष यान प्रमोचित किए जा चुके हैं। भारत सरकार के स्वामित्व वाले प्रचालनात्मक उपग्रहों की संख्या निम्न भू-कक्षा (लियो) में 22 और भू-तुल्यकालिक भू कक्षा (जियो) में 31 थी। एनवीएस-02 एक दीर्घवृत्ताकार भू-तुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में कार्यरत रहा।
  • इसके अलावा, चंद्रयान-2 ऑर्बिटर (सीएच2O) और आदित्य-एल1 नामक दो भारतीय अंतरिक्ष मिशन भी सक्रिय हैं, जो सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु पर स्थित हैं। वर्ष 2025 की उल्लेखनीय घटनाओं में से एक चंद्रयान-3 मिशन के नोदन मॉड्यूल (पीएम)का चंद्रमा के निकट से गुजरना था, जिसे नवंबर 2023 में अपनी मूल 150 किमी की वृत्ताकार ध्रुवीय कक्षा से हटकर पृथ्वी की उच्च तुंगता वाली कक्षा में स्थापित किया गया था। अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण क्षेत्रों की परस्पर क्रिया के कारण नवंबर 2025 में अंतरिक्ष यान चंद्रमा के प्रभाव क्षेत्र (एसओआई) में पुनः प्रवेश कर गया, जहां चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल इसकी गति पर हावी रहा।
  • भारत के अविकल ऊपरी चरणों में से कुल 36 रॉकेट पिंड 31 दिसंबर 2025 तक पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर चुके हैं। एलवीएम3-एम2/वनवेब इंडिया1 मिशन, एलवीएम3-एम5/सीएमएस-03 और एलवीएम3-एम6/बीबी-1 मिशन के रॉकेट पिंडों के अलावा सभी एलवीएम3 रॉकेट पिंड विघटित हो चुके हैं। जीएसएलवी रॉकेट पिंडों में से जीएसएलवी-एफ12, जीएसएलवी-एफ14, जीएसएलवी-एफ15 और जीएसएलवी-एफ16 रॉकेट पिंड कक्षा में हैं। वर्ष 2025 के अंत तक कोई भी एसएसएलवी रॉकेट पिंड कक्षा में उपस्थित नहीं है।

वर्ष 2025 के दौरान भारतीय वस्तुओंकी अंतरिक्ष में स्थिति

  • श्रीहरिकोटा केंद्र से पांच प्रमोचन हुए, जिनमें जीएसएलवी-एफ15/एनवीएस-02, पीएसएलवी-सी61/ईओएस-9, जीएसएलवी-एफ16/निसार, एलवीएम3-एम5/सीएमएस-03 और एलवीएम3-एम6/ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 मिशन शामिल थे। पीएसएलवी-सी61 के अलावा बाकी सभी प्रमोचनों ने अपनी निर्धारित कक्षाओं में सफलतापूर्वक नीतभारों को स्थापित कर दिए। पीएसएलवी-सी61 के तीसरे चरण में खराबी आ गई, जिसके कारण यह उपकक्षीय उड़ान भर सका और ईओएस-9 उपग्रह को उसकी कक्षा में स्थापित नहीं कर पाया। जीएसएलवी-एफ15 ने एसडीएससी-शार से भारतीय प्रमोचन यान का 100वां प्रमोचन पूरा किया। जीसएलवी-एफ15 द्वारा प्रमोचित एनवीएस-02 उपग्रह नोदन प्रणाली की विफलता के कारण जीटीओ में सटीक रूप से स्थापित होने के बावजूद अपनी निर्धारित कक्षा में नहीं पहुंच सका। नासा-इसरो का संयुक्त मिशन निसार 30 जुलाई 2025 को सफलतापूर्वक प्रमोचित किया गया। सीएमएस-03/जीसैट-7आर को भी सफलतापूर्वक प्रमोचित किया गया और उसे उसके निर्धारित देशांतर स्लॉट में स्थापित किया गया।परिणामस्वरूप, भारतीय प्रमोचन यानों द्वारा कुल 2 भारतीय उपग्रह, 1 विदेशी उपग्रह और 4 रॉकेट पिंडों को उनकी निर्धारित कक्षाओं में स्थापित किया गया। इसके अतिरिक्त, अमेरिका से तीन फायरफ्लाई उपग्रह, एनआईएलएऔर एलईएपी-1 भी प्रक्षेपित किए गए। इस प्रकार, कुल 8 भारतीय उपग्रह कक्षा में स्थापित किए गए।
# भारतीय प्रमोचन यान भारतीय उपग्रह विदेशी नीतभार
इसरो/भा.स. निजी/ शैक्षणिक
1. लागू नहीं - फ़ायरफ्लाई 1, 2, 3 (वेनदेनबुर्ग स्पेस फोर्स बेस, कैलिफोर्निया से परिवाहक12 द्वारा) -
2. जीएसएलवी-एफ15 / एनवीएस-02 एनवीएस-02 - -
3. लागू नहीं - एनआईएलए (वेनदेनबुर्ग स्पेस फोर्स बेस, कैलिफोर्निया से परिवाहक 13 द्वारा) -
4. जीएसएलवी-एफ16/निसार निसार - -
5. लागू नहीं - लीप-1 (वेनदेनबुर्ग स्पेस फोर्स बेस, कैलिफोर्निया से फाल्कन-9 ब्लॉक 5) -
6. एलवीएम3 एम5/सीएमएस-03 सीएमएस-03 - -
7. एलवीएम3 एम6/ बीबी2बी - - ब्लू बर्ड ब्लॉक 2
  • प्रमोचन यानों के उत्थापन क्लियरेंसके लिए टकराव बचावविश्लेषण (सीओएलए) किया गया।
# मिशन नामीय उत्थापन समय (यूटीसी) नामीय उत्थापन में बदलाव शार में प्रमोचन पैड
1 जीएसएलवी-एफ15/एनवीएस-02 29-01-2025 00:53:00 - द्वितीय
2 पीएसएलवी-सी61/ईओएस-09 18-05-2025 00:29:00 - प्रथम
3 जीएसएलवी-एफ16/निसार 30-07-2025 12:10:25 - द्वितीय
4 एलवीएम3-एम5/सीएमएस-03 02-11-2025 11:56:00 - द्वितीय
5 एलवीएम3-एम6/ ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 24-12-2025 03:24:49 41 सेकंड की देरी से 03:25:30 यूटीसी पर प्रसारित होगा। द्वितीय

सीओएलए की सिफारिश के आधार पर एलवीएम3 एम6 मिशन का प्रमोचन 41 सेकंड के लिए विलंबित हुआ।

  • यूएसस्पेसकॉम के संयुक्त अंतरिक्ष प्रचालन केंद्र (सीएसपीओसी) द्वारा इसरो के पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले उपग्रहों के लिए जारी की गई 1,50,000 से अधिक चेतावनियों का विश्लेषण प्रचालनात्मक उड़ान गतिकी से प्राप्त अधिक सटीक कक्षीय डेटा का उपयोग करके किया गया। जियो के लिए टकराव से बचाव के 4 उपाय (सीएएम) किए गए, जबकि लियो उपग्रहों के लिए 14 सीएएम किए गए, जिनमें निसार के लिए एक सीएएम भी शामिल है, जिसे नासा की शब्दावली में जोखिम शमन उपाय (रिस्क मिटिगैशन मन्यूवर) कहा जाता है। जहां भी संभव हो, विशेष सीएएम से बचने के लिए कक्षा रखरखाव उपायों को समायोजित करके टकराव से बचाव की आवश्यकताओं को पूरा किया गया।
अंतरिक्ष यान का कक्षीय क्षेत्र सीएएम की संख्या टिप्पणी
लियो 14 जहाँ भी संभव था, नियमित कक्षा प्रयुक्तियों में टक्कर से बचाव की आवश्यक्ता को शामिल किया गया
जियो 4
कुल (लियो + जियो) 18
ग्रहीय (चंद्रयान-2) 2 एलआरओ के साथ संयोजन की स्थिति के लिए 1 जनवरी और 24 जुलाई, 2025 को कक्षीय प्रयुक्तियोजना में संशोधन किया गया।
Cumulative number of CAMs performed since 2011

Figure 3: Cumulative number of CAMs performed since 2011

  • सभी प्रयुक्तियों, जिनमें सीएएम की प्रयुक्तियाँ भी शामिल थीं, का निकट संपर्क जोखिम विश्लेषण किया गया ताकि प्रयुक्तियोंके कुछ दिनों के भीतर अन्य नजदीकी अंतरिक्ष पिंडों के साथ किसी भी संभावित निकट संपर्क की संभावना को समाप्त किया जा सके; लियो उपग्रहों के लिए प्रयुक्तियोंके बाद अन्य अंतरिक्ष पिंडों के साथ निकट संपर्क से बचने के लिए 82 प्रयुक्तियोजनाओं को संशोधित किया गया। इसी प्रकार, दो अवसरों पर, जियो उपग्रहों के लिए प्रयुक्तियोंके बाद अन्य अंतरिक्ष पिंडों के साथ निकट संपर्क से बचने के लिए प्रयुक्तियोजनाओं को संशोधित करना पड़ा।
अंतरिक्ष यान का कक्षीय क्षेत्र कक्षीय प्रयुक्तियों की संख्या
लियो 563
जियो 519 (स्पंदन उपायों को छोड़कर)
चंद्रयान-2 ऑर्बिटर 16
  • अंतरिक्ष के गहन मिशनों के लिए भी संयोजन निर्धारण और टकराव के जोखिम का शमन करने के लिए इसी तरह की कार्यप्रणाली अपनाई गई थी। चंद्रयान-2 ऑर्बिटर (सीएच2ओ) के लिए 16 संयोजन निर्धारण किए गए और दो बार प्रयुक्तियोंकी योजनाओं में बदलाव किया गया।
  • अंतरिक्ष उड़ान सुरक्षा के लिए आवश्यक समन्वय सभी प्रचालनात्मक उपग्रहों के लिए किया गया था। सीएच2ओ के मामले में, चंद्रमा की परिक्रमा के दौरान फायरफ्लाई एयरोस्पेस, इंट्यूटिव मशीन्स और आईस्पेस के साथ ऐसा समन्वय नासा द्वारा सुगम बनाया गया था।
  • अपने मिशन के अंत में, आईआरएनएसएस-1डी उपग्रह को भूस्थिर क्षेत्र से लगभग 600 किमी ऊपर एक निष्क्रिय कक्षा में स्थापित कर दिया गया। हालांकि मिशन के अंत में भूस्थिर उपग्रहों को अधि-तुल्यकाली कक्षाओं में स्थानांतरित करना इसरो की एक नियमित प्रक्रिया रही है, लेकिन यह पहली बार है जब किसी भारतीय उपग्रह को झुकी हुई भू-तुल्यकाली कक्षा में तैनात किया गया है। कार्टोसैट-2ए उपग्रह, जिसे वर्ष 2008 में प्रमोचित किया गया था और जिसने सफलतापूर्वक अपने 5 साल के निर्धारित मिशन जीवन को पूरा कर उससे कहीं अधिक समय तक कार्य किया, वर्ष 2025 में निष्क्रिय हो गया।
  • रिपोर्टिंग वर्ष में, टीईएस और पीओईएम-4 प्राकृतिक क्षय के कारण पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर गए। एसएसएलवी-डी3 मिशन के और दो ऊपरी चरण, वेलोसिटी ट्रिमिंग मॉड्यूल (वीटीएम) और सॉलिड स्टेज (एसएस3), भी वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर गए। पीएसएलवी सी3 के विखंडन से उत्पन्न आठ मलबे वर्ष 2025 में वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर गए, जबकि 31 दिसंबर 2025 तक 33 मलबे अभी भी कक्षा में मौजूद थे। इस प्रकार, वर्ष 2025 में वायुमंडल में पुनः प्रवेश करने वाली भारतीय वस्तुओं की कुल संख्या 12 है।
  • वर्ष 2025 की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि स्पैडेक्स मिशन थी, जिसने स्वायत्त मिलन, डॉकिंग और अनडॉकिंग क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इस मिशन के लिए प्रमोचन यान के ऊपरी चरण, जिसे पीएस4 कक्षीय प्रयोगात्मक मॉड्यूल/पीओईएम-4 प्लेटफॉर्म के नाम से जाना जाता है, पर स्थानांतरित करने योग्य रोबोटिक आर्म और रोबोटिक मैनिपुलेटर के प्रचालन का भी सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया। ऐसे प्रदर्शन भविष्य में मिशन की अवधि बढ़ाने, सक्रिय मलबे को हटाने और अंतरिक्ष में सर्विसिंग और संयोजन जैसे प्रयासों के माध्यम से अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता में बड़ी प्रगति करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
  • वर्ष 2025 में भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने ड्रैगन क्रू मॉड्यूल में सवार होकर आईएसएस के लिए निजी एक्सिओम 4 मानवयुक्त मिशन का नेतृत्व करते हुए एक ऐतिहासिक यात्रा की। यह मिशन 25 जून को कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र के प्रमोचन परिसर 39ए से प्रमोचित किया गया था, जिसमें ड्रैगन अंतरिक्ष यान 26 जून को आईएसएस से सफलतापूर्वक जुड़ा, 14 जुलाई को अलग हुआ और 15 जुलाई को समुद्र में उतरा।

अंतरिक्ष स्थिरता को संरक्षित करने के प्रयास

बेंगलूरु में आयोजित आईएडीसी की 42वीं वार्षिक बैठक के प्लेनरी सत्र के दौरान, वर्ष 2024 में घोषित किए गए मलबा रहित अंतरिक्ष मिशन (डीएफएसएम) के उद्देश्यों को पूरा करने के प्रयास जारी रखे गए। डीएफएसएम का लक्ष्य वर्ष 2030 तक सभी भारतीय अंतरिक्ष भागीदारों, सरकारी या गैर-सरकारी, द्वारा मलबे रहित अंतरिक्ष मिशनों को पूरा करना है। इसके लिए डिजाइन, प्रचालन और निपटान चरणों के दौरान लियो उपग्रहों की मिशन के बाद कक्षा से बाहर निकलने की क्षमता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त ईंधन का आवंटन करना जैसे आवश्यक उपाय अपनाए जाएंगे।

अंतरिक्ष वस्तुओं का अनुवर्तन और विश्लेषण (नेत्रा) परियोजना के माध्यम से स्वदेशी अंतरिक्ष वस्तु अनुवर्तन (एसएसए) क्षमता निर्माण के अंतर्गत, लद्दाख के हानले में एक प्रकाशीय टेलीस्कोप की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। एक राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ समिति द्वारा वर्ष 2025 में स्वदेशी चरणबद्ध सरणी अंतरिक्ष पिंड अनुवर्तन रडार के डिज़ाइन और समीक्षा का कार्य पूरा किया गया। भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्वदेशी रूप से विकसित रडार स्थापित करने के प्रयास जारी हैं। श्रीहरिकोटा स्थित बहु-पिंड अनुवर्तन रडार (एमओटीआर) वर्तमान में भारतीय रॉकेट निकायों और पीओईएम-4 जैसे उपग्रहों सहित अंतरिक्ष वस्तुओं का वायुमंडल में पुनः प्रवेश से पहले उनकी अंतिम कुछ कक्षाओं के दौरान, जहाँ भी संभव हो, अनुवर्तन करता है। एआरआईईएस के सहयोग से नैनीताल में वर्तमान में नवीनीकृत हो रही बेकर नन श्मिट टेलीस्कोप (बीएनएसटी) से भी निकट भविष्य में अंतरिक्ष वस्तु अनुवर्तन क्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है।

भारत अंतरिक्ष मलबे से संबंधित चर्चाओं में अंतर-एजेंसी अंतरिक्ष मलबा समन्वय समिति (आईएडीसी), आईएए अंतरिक्ष मलबा समिति, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष महासंघ (आईएएफ) एसटीएम समिति, आईएसओ कार्य समूह 7 और दीर्घकालिक स्थिरता पर संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह जैसे अंतरारक्षत्रीय मंचों पर सक्रिय रूप से भाग लेता है और प्रासंगिक सुझाव प्रदान करता है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के साथ समन्वय में, इसरो अंतरिक्ष उड़ान सुरक्षा से संबंधित सर्वोत्तम प्रथाओं के लिए निजी संस्थाओं के साथ सहयोग और अनुभव साझा करने के लिए जुड़ा हुआ है।

बाह्य अंतरिक्ष गतिविधियों की निरन्तरता के संरक्षण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के तहत, इसरो डीएफएसएम के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अंतरिक्ष मलबे को कम करने के उपायों को सक्रिय रूप से लागू करना जारी रखेगा और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संबंधित हितधारकों के साथ सहयोग करेगा।