29 जनवरी, 2026
गगनयान मिशन के अंतर्गत भारत का मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम अल्पावधि मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों के विकास के साथ एक परिवर्तनकारी चरण में प्रवेश कर रहा है, जो भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) के माध्यम से निम्न भू कक्षा (एलईओ) में मानव की सतत उपस्थिति की ओर अग्रसर है। इन मिशनों को न केवल तकनीकी उपलब्धियों के रूप में, बल्कि सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण के अनूठे वातावरण में अत्याधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान को सक्षम बनाने वाले मंचों के रूप में भी परिकल्पित किया गया है। इस परिकल्पना को ध्यान में रखते हुए, इसरो ने भारतीय सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण प्रयोग – आईएमएक्स -2026 की घोषणा की है, जो एक अवसर की घोषणा (एओ) है, जिसमें भारतीय अनुसंधान समुदाय से वैज्ञानिक रूप से सार्थक सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण प्रयोगों की अवधारणा, विकास और प्रदर्शन के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं।
आईएमएक्स-2026 सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण से संबंधित विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला को आच्छादित करने वाले प्रस्तावों को प्रोत्साहित करता है, जिनमें सामग्री विज्ञान, अंतरिक्ष जीव विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष कृषि, औषध विज्ञान और औषधि अनुसंधान, द्रव भौतिकी और तापीय परिवहन, प्रज्वलन और अग्नि सुरक्षा, अंतरिक्ष में विनिर्माण और संसाधन शामिल हैं, लेकिन ये इन्हीं तक सीमित नहीं हैं।
सरकारी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों, राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशालाओं, भारतीय स्टार्ट-अप्स और उद्योग से संबद्ध प्रधान अन्वेषकों (पीआई) के लिए आवेदन खुले हैं।
आईएमएक्स-2026 के अंतर्गत, प्रधान अन्वेषकों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने संस्थागत संसाधनों का उपयोग करते हुए प्रयोगशाला स्तर के मॉडलों के माध्यम से अपने प्रस्तावित प्रयोगों की वैज्ञानिक व्यवहार्यता को पहले प्रदर्शित करें। प्रस्तावित शोध की गुणवत्ता, परिपक्वता और संभावित प्रभाव के आधार पर, महत्वकांक्षी प्रयोगों को स्थलीय सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण मंचों पर मान्यता प्रदान करने के लिए सहयोग दिया जा सकता है। तत्पश्चात सुरक्षा, व्यवहार्यता, मंचों की सीमाओं और अपेक्षित वैज्ञानिक परिणामों को ध्यान में रखते हुए, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन सहित निम्न भू कक्षा में इसरो-समर्थित उड़ान अवसरों के लिए चयनित प्रयोगों पर विचार किया जा सकता है।
इस कार्यक्रम के दौरान, चयनित प्रयोगों के सफल निष्पादन को सुनिश्चित करने के लिए, आवश्यकतानुसार और उपलब्धता के आधार पर, इसरो द्वारा परामर्श, तकनीकी मार्गदर्शन और इंजीनियरिंग समन्वय प्रदान किया जाएगा। सभी सहयोग और सहायता व्यवस्थाओं को एचएसएफसी और सहभागी संस्थानों या कंपनियों के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) के माध्यम से औपचारिक रूप दिया जाएगा।
आईएमएक्स-2026 भारतीय शोधकर्ताओं के लिए देश के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम में प्रत्यक्ष योगदान देने और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण के क्षेत्र में मौलिक और अनुप्रयुक्त विज्ञान को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है। सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण वातावरण की आवश्यकता वाले प्रभावशाली विचारों के शोधकर्ताओं को इसमें प्रतिभागिता करने और अंतरिक्ष में सतत मानव उपस्थिति की दिशा में भारत की यात्रा का हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
अवसर की घोषणा, पात्रता, प्रस्ताव प्रारूप और जमा करने की प्रक्रिया के विवरण के लिए यहां क्लिक करें।
वर्तमान चक्र के लिए 28 फरवरी, 2026 तक प्रस्तुत प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा।