अंतरिक्ष विज्ञान और संबंधित प्रौद्योगिकियों में सहयोग के लिए इसरो और टीआईएफआर ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
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20 अप्रैल, 2026

अंतरिक्ष विज्ञान और संबंधित प्रौद्योगिकियों में सहयोग के लिए इसरो और टीआईएफआर ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

भारत के अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक घटना के रूप में, 20 अप्रैल, 2026 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) ने टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (टीआईएफआर), परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के साथ अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अन्वेषण के क्षेत्र में वैज्ञानिक सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर समारोह बेंगलूरु स्थित इसरो मुख्यालय में आयोजित किया गया और इसकी अध्यक्षता अध्यक्ष, इसरो / सचिव, अंतरिक्ष विभाग, डॉ. वी. नारायणन ने की।

इस समझौता ज्ञापन पर इसरो के वैज्ञानिक सचिव श्री एम. गणेश पिल्लई और टीआईएफआर के निदेशक प्रोफेसर जयराम चेंगलर ने हस्ताक्षर किए। इस घटना के साक्षी के रूप में विज्ञान कार्यक्रम कार्यालय (एसपीओ) के निदेशक डॉ. तीर्थ प्रतिम दास और उप निदेशक गिरीश वी., इसरो मुख्यालय, प्रोफेसर दिव्या ओबेरॉय और डॉ. जो नीनन, टीआईएफआर उपस्थित थे।

यह आयोजन एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि यह इसरो और टीआईएफआर के बीच वैज्ञानिक सहयोग के लिए औपचारिक ढांचा स्थापित करता है, ये दोनों संगठन अंतरिक्ष विज्ञान में कई दशकों से एक अटूट संबंध साझा करते रहे हैं। टीआईएफआर ने जहां शुरुआती गुब्बारा प्रयोगों और एस्ट्रोसैट जैसी मिशन-विशिष्ट साझेदारियों के माध्यम से भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रारंभिक दिनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वहीं यह समझौता ज्ञापन बाह्य अंतरिक्ष के भू और अंतरिक्ष-आधारित वैज्ञानिक अन्वेषण में एक संरचित बहु-वर्षीय सहयोग प्रदान करता है।

सचिव,अंतरिक्ष विभाग /अध्यक्ष, इसरो ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि यह समझौता ज्ञापन विज्ञान में सहयोग के औपचारिक ढांचे में मौजूद एक महत्वपूर्ण कमी को पूरा करता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत एक ऐसे युग में प्रवेश कर रहा है जहां विज्ञान बाह्य ग्रहों के अध्ययन और अनेक राष्ट्रीय क्षमताओं के विकास तक विस्तारित हो रहा है। इसरो और टीआईएफआर के बीच सहयोग से वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष विज्ञान में उत्कृष्टता प्राप्त करने के राष्ट्र के लक्ष्य को साकार करने में सहायता मिलेगी। इसरो के वैज्ञानिक सचिव ने टीआईएफआर को "भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का उद्गम स्थल" बताते हुए देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रारंभिक दिनों में उस महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख किया, जिसने एस्ट्रोसैट मिशन में टीआईएफआर के योगदान का मार्ग प्रशस्त किया। टीआईएफआर के निदेशक ने इस बात पर बल दिया कि संस्थान राष्ट्रीय अंतरिक्ष और भू आधारित तकनीकी क्षमताओं का लाभ उठाकर ऐसी परियोजनाओं का प्रस्ताव रखेगा जो मूलभूत वैज्ञानिक ज्ञान को राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप ठोस प्रगति में परिवर्तित करेगा।

यह साझेदारी शैक्षणिक उत्कृष्टता और अंतरिक्ष अवसंरचना के बीच एक सुगम समन्वय स्थापित करके अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाती है। यह समझौता ज्ञापन स्वदेशी हार्डवेयर और संयुक्त परीक्षण सुविधाओं के सह-विकास के माध्यम से विदेशी संस्थाओं पर निर्भरता को कम करता है। इसके अलावा, यह सहयोग सुनिश्चित करता है कि संयुक्त गतिविधियाँ भारत को वैश्विक मूलभूत अंतरिक्ष विज्ञान में अग्रणी स्थान पर स्थापित करेगी।