इसरो रोबोटिक्स चैलेंज – यूआरएससी (आईआरओसी-यू) 2026
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03 अगस्त, 2026

इसरो रोबोटिक्स चैलेंज – यूआरएससी (आईआरओसी-यू) 2026 युवा अन्वेषकों को अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत का भविष्य संवारने के लिए प्रेरित करता है।

इसरो रोबोटिक्स चैलेंज – यूआरएससी (आईआरओसी-यू) एक राष्ट्रीय स्तर का वार्षिक नवाचार चैलेंज है, जिसे इसरो के यू आर राव उपग्रह केंद्र (यूआरएससी) ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास चंद्रयान-3 विक्रम लैंडर के सहज अवतरण की स्मृति को बनाए रखने के लिए वर्ष 2024 से शुरू किया है। नवाचार, आत्मनिर्भरता और वैज्ञानिक उत्कृष्टता की भावना से प्रेरित यह चैलेंज देश भर के छात्रों को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप उन्नत प्रौद्योगिकियाँ विकसित करने के लिए एक अनोखा मंच प्रदान करता है।

आईआरओसी-यू 2026 के तृतीय संस्करण के विषय 'स्वार्म अभियान की ओर: अन्वेषण, नौवहन और गतिशीलता के लिए स्वायत्त सर्वेक्षक चुनौती (एएससीईएनडी)' द्वारा प्रतिभागियों को एक पूर्णतः स्वायत्त मानवरहित हवाई यान (यूएवी) और आधार केंद्र को डिज़ाइन और प्रदर्शित करने की चुनौती दी गई थी, जो जीपीएस-वंचित वातावरण में सर्वेक्षण, नौवहन, विशेषता पहचान, स्वायत्त अवतरण, डेटा स्थानांतरण और चार्जिंग करने में सक्षम होते हुए भविष्य के ग्रहीय अन्वेषण अभियानों का सटीक अनुकरण करे। इस प्रतियोगिता ने छात्रों को कक्षा में प्राप्त अवधारणाओं को एक कठोर बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से परिष्कृत स्वायत्त रोबोटिक प्रणालियों में बदलने में सक्षम बनाया, जिसमें पंजीकरण, प्रारंभिक योग्यता, निष्कासन और अंतिम क्षेत्र दौर शामिल थे।

अंतिम क्षेत्र दौर में भारत की उभरती इंजीनियरिंग प्रतिभा की झलक दिखी।

आईआरओसी-यू 2026 का अंतिम क्षेत्र दौर देश के सबसे होनहार युवा अन्वेषकों को एक साथ लाते हुए 21 से 23 जुलाई 2026 तक बेंगलूरु के यू आर राव उपग्रह केंद्र (यूआरएससी) में आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 590 पंजीकृत टीमों के बीच में से एक व्यापक देशव्यापी चयन प्रक्रिया के बाद केवल शीर्ष बीस टीमें ही फ़ाइनल में पहुँचीं।

इस कार्यक्रम का उद्घाटन यूआरएससी के निदेशक श्री एम. शंकरन ने मुख्य मूल्यांकनकर्ता डॉ. वी. कोटेश्वर राव और आईआरओसी-यू 2026 के अध्यक्ष श्री के. वी. एस. भास्कर की उपस्थिति में किया। तीन दिन तक चले इस कार्यक्रम में, अंतिम दौर की टीमों ने बेहतरीन तकनीकी कौशल दिखाते हुए भविष्य में ग्रहों की खोज के दौरान आने वाली वास्तविक चुनौतियों को दर्शाते हुए जटिल स्वायत्त मिशन पूरे किए। टीमों के नवीन समाधानों ने रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त नौवहन, कंप्यूटर विजन और सन्निहित प्रणालियों के क्षेत्र में बेहतरीन क्षमता का प्रदर्शन किया, जिसने उन्नत इंजीनियरिंग में भारत के छात्र समुदाय की बढ़ती क्षमताओं को विशिष्ट रूप से दिखाया।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, गणमान्य व्यक्तियों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आईआरओसी-यू अब सिर्फ़ एक रोबोटिक्स प्रतियोगिता नहीं रह गई है। चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता के बाद शुरू की गई यह पहल एक राष्ट्रीय नवाचार मंच के रूप में उभरी है, जो छात्रों को भारत के अंतरिक्ष लक्ष्यों के अगले चरण से जुड़ी इंजीनियरिंग चुनौतियों पर काम करने के लिए प्रोत्साहित करती है। प्रतिभागियों को पारंपरिक कक्षा की पढ़ाई से आगे बढ़ने, मुश्किल तकनीकी समस्याओं का आत्मविश्वास के साथ सामना करने और यह भरोसा जगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया कि दृढ़ संकल्पी एवं नवोन्मेषी विचार के लिए कोई भी इंजीनियरिंग चुनौती मुश्किल नहीं है।

अध्यक्ष, इसरो ने छात्रों से भारत के भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के निर्माता बनने का आह्वान किया।

23 जुलाई 2026 को हुए समापन समारोह में शामिल सचिव, अंतरिक्ष विभाग और अध्यक्ष, इसरो, डॉ. वी. नारायणन के प्रेरणादायक भाषण में आईआरओसी-यू 2026 के पीछे की व्यापक सोच की झलक मिली। इस उपलक्ष्य पर, डॉ. वी. नारायणन ने आईआरओसी-यू 2026 के तीसरे संस्करण के सफल आयोजन और प्रतिभागी छात्र टीमों, परामर्शदाताओं, मूल्यांकनकर्ताओं और आयोजकों की शानदार उपलब्धियों, नवाचरों और समर्पण का जश्न मनाने के स्मरण में स्मारिका जारी की।

अपने मुख्य भाषण में, अध्यक्ष, इसरो ने प्रतिभागियों को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का भविष्य का निर्माता बताया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि आईआरओसी-यू जैसी पहलें वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और अंतरिक्ष में भारत के भविष्य को आकार देने वाली इंजीनियरों, वैज्ञानिकों तथा प्रौद्योगिकी नेतृत्व की अगली पीढ़ी को तैयार करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

उन्होंने भारत की प्रेरणादायक अंतरिक्ष यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने उस दौर से, जब रॉकेट के पुर्जे साइकिलों और बैलगाड़ियों से ले जाए जाते थे, आज मंगलयान, चंद्रयान-3, स्पैडेक्स तथा नासा–इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (निसार) जैसे विश्वस्तरीय मिशनों तक का गौरवपूर्ण सफर तय किया है। उन्होंने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की प्रत्येक उपलब्धि दृढ़ संकल्प, नवाचार, टीमवर्क तथा स्वदेशी क्षमताओं पर अटूट विश्वास के बल पर ही संभव हो सकी है।

उन्होंने प्रतिभागियों को आज की उपलब्धियों से आगे बढ़कर सपने देखने, पूरे आत्मविश्वास के साथ इंजीनियरिंग की बड़ी चुनौतियों को स्वीकार करने और केवल प्रौद्योगिकी का उपयोग करने वाले के बजाय परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकी रचयिता बनने के लिए प्रोत्साहित किया। दृढ़ संकल्प और हिम्मत के साथ बेहतरीन काम करने के लिए प्रेरित करते हुए, उन्होंने भरोसा जताया कि आज युवाओं के दिमाग से निकलने वाले नए सुझाव भारत की भविष्य की उपलब्धियों-खासकर अंतरिक्ष की खोज और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नेतृत्व-की नींव रखेंगे।

उनके संबोधन ने प्रतिभागियों पर गहरा प्रभाव डाला तथा इस विश्वास को और मज़बूत किया कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का आगामी अहम अध्याय ऐसे युवा अन्वेषक लिखेंगे, जिनमें बड़े सपने देखने, निडर होकर नई खोज करने और लगातार डटे रहने का साहस हो।

प्रतिस्पर्धा से परे नवाचार

आईआरओसी-यू 2026 के मुख्य मूल्यांकनकर्ता डॉ. वी. कोटेश्वर राव ने इस कार्यक्रम को नवाचार का एक सच्चा उत्सव बताया। उन्होंने छात्रों के समाधानों की बेहतरीन गुणवत्ता और पूरी चुनौती के दौरान दिखाई गई स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना की सराहना की।

यूआरएससी के निदेशक श्री एम. शंकरन ने बताया कि आईआरओसी-यू की असली कामयाबी सिर्फ़ विजेताओं को चुनने में नहीं है, बल्कि युवा अन्वेषकों में आत्मविश्वास, तकनीकी काबिलियत, रचनात्मकता, टीमवर्क और सीखने के प्रति जीवन भर का जुनून जगाने में है। उन्होंने कहा कि असल दुनिया की इंजीनियरिंग समस्याओं को हल करने से मिलने वाला अनुभव छात्रों को ऐसी सोच और काबिलियत देता है, जिससे वे भारत के भविष्य के अंतरिक्ष मिशन में अहम योगदान दे सकें।

प्रतिभागियों के स्वयं के अनुभव भी समान रूप से प्रेरणादायक थे। उन्होंने महीनों के प्रयोग, बार-बार किए गए री-डिज़ाइन, फेल हुए प्रोटोटाइप, क्रैश हुए ड्रोन, बिना सोए बिताई रातें और लगातार की गई मेहनत के बारे में बताया, जिसने आखिरकार सुझाव को पूरी तरह से स्वचालित रोबोटिक प्रणाली में बदल दिया। अनेक छात्रों के लिए, आईआरओसी-यू एक जीवन बदलने वाला सफ़र बन गया, जिसने उनकी तकनीकी क्षमताओं को मज़बूत किया और साथ ही उनमें मुश्किलों का सामना करने की हिम्मत, समस्या सुलझाने की क्षमता, मिल-जुलकर काम करने की भावना और देश भर के साथियों के साथ पक्की दोस्ती को बढ़ावा दिया।

आईआरओसी-यू 2026 के विजेताओं की घोषणा 23 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 के समारोह के दौरान की जाएगी।

अंतरिक्ष क्षेत्र में नई पीढ़ी के इनोवेटर्स को तैयार करना

आईआरओसी-यू 2026 के समापन के साथ ही, इसरो ने देश के नवाचार परितंत्र को बढ़ावा देने के अपने अटूट संकल्प को फिर से दोहराया। यह पहल छात्रों को भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों से प्रेरित वास्तविक दुनिया की इंजीनियरिंग चुनौतियों को हल करने के लिए सशक्त बनाती है। सिर्फ़ एक प्रतियोगिता से कहीं आगे बढ़कर, आईआरओसी-यू एक प्रमुख राष्ट्रीय नवाचार मंच बन गया है, जहाँ जिज्ञासा को क्षमता में, विचारों को तकनीक में और युवा अन्वेषकों को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के भविष्य के नेताओं में परिवर्तित किया जाता है।

हर नए संस्करण के साथ, यह चुनौती तकनीकी रूप से सशक्त भारत की नींव को और मज़बूत करने का काम करती है। यह छात्रों को नवाचार की नई सीमाएँ छूने और अंतरिक्ष अन्वेषण में देश की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं में योगदान देने के लिए प्रेरित करती है। आईआरओसी-यू 2026 का मुख्य संदेश स्पष्ट था: भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का भविष्य आज प्रेरित हो रहे युवा दिमागों की कल्पनाशीलता, समझदारी और दृढ़ संकल्प से ही तय होगा।

चैलेंज, विषय, कार्य, पात्रता, नियम पुस्तिका, समय सारणी, घोषणाओं और कार्यक्रम से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए, कृपया आईआरओसी-यू 2026 के आधिकारिक वेबपेज पर जाएँ:

https://www.ursc.gov.in/IRoC-U2026/

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