सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण अनुसंधान पर पहली राष्ट्रीय कार्यशाला
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19 जुलाई, 2026
इसरो के मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र (एचएसएफसी) ने 15 जुलाई 2026 को बेंगलूरु में इसरो मुख्यालय में सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान पर पहली राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। इसका उद्देश्य भारत में दीर्घकालिक सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान परितंत्र पर चर्चा करने के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराना था। इस कार्यशाला में देश भर के शिक्षा जगत, अनुसंधान प्रयोगशाला, उद्योग, स्टार्टअप, सरकारी संगठनों और इसरो केंद्रों से 270 से ज़्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
इस कार्यशाला में भारत की हालिया सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान गतिविधियों, एक्सिओम-4 मिशन के दौरान आईएसएस पर किए गए प्रयोगों से मिले अनुभवों और वैज्ञानिक नतीजों, तथा भारतीय सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण प्रयोग (आईमेक्स-2026) पहल के अंतर्गत मौजूदा स्थिति और भविष्य के अवसरों पर प्रस्तुति दी गई। दो पैनल चर्चाओं में भारत में सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान के लिए अनुसंधान और औद्योगिक क्षमताएं विकसित करने के विषयों पर बात की गई।
सचिव, अंतरिक्ष विभाग / अध्यक्ष, इसरो डॉ. वी. नारायणन ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत में सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण अनुसंधान परितंत्र बनाया जाए, ताकि सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण स्थितियों में अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी, भौतिक विज्ञान, पदार्थ एवं विनिर्माण, मानव अनुसंधान और अंतरिक्ष जैविकी के क्षेत्रों में अत्याधुनिक अनुसंधान से मिलने वाले संभावित फ़ायदों का लाभ उठाया जा सके।
कार्यशाला का समापन श्री ए. एस. किरण कुमार, भारतीय मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम में सूक्ष्मगुरुत्व अनुसंधान हेतु राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष, की अध्यक्षता में आयोजित एक संवादात्मक मुक्त सत्र के साथ हुआ। इस सत्र में इसरो तथा व्यापक वैज्ञानिक समुदाय की उस सामूहिक प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि की गई, जिसके तहत भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों को सशक्त बनाने के लिए एक सहयोगात्मक, बहुविषयक एवं आत्मनिर्भर सूक्ष्मगुरुत्व अनुसंधान परितंत्र विकसित किया जाएगा। यह प्रयास न केवल मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों को नई दिशा देगा, बल्कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज के लिए भी व्यापक एवं दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करेगा।