ईओएस-06/ओशनसैट-3 ने भूमध्यवर्ती प्रशांत महासागर में बन रहे अल नीनो का समुद्री उत्पादकता
पर असर का पता लगाया
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पर असर का पता लगाया
10 सितंबर, 2026
अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में होने वाली एक बड़ी वैश्विक जलवायु घटना है, जिसमें असामान्य रूप से गर्म होने (अल नीनो) और ठंडा होने (ला नीना) के प्रत्यावर्ती चरण आते हैं। उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में होने वाले ये बड़े परिवर्तन दुनिया भर में मौसम और जलवायु के पैटर्न को प्रभावित कर सकते हैं।
अल नीनो के दौरान, भूमध्यरेखीय व्यापारिक हवाओं के कमजोर होने और तापप्रवणस्तर के गहराने से सतह के नीचे से ठंडे, पोषक तत्वों से भरपूर पानी का ऊपर की ओर अभिगमन कम हो जाता है। महासागर की ऊपरी सूर्य दीप्त सतह तक कम पोषक तत्व पहुँचने से फाइटोप्लांकटन की वृद्धि बाधित हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप सतह पर क्लोरोफिल-ए की सांद्रता कम हो जाती है और फलस्वरूप समुद्री उत्पादकता घट जाती है।
वर्ष 2026 के दौरान ईएनएसओ के विकास को बेहतर ढंग से समझने के लिए, इसरो के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन संस्थान (एनआरएससी) ने 2023-2026 के अप्रैल, मई और जून महीनों के दौरान उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में ओशन कलर मॉनिटर-3 (ओसीएम-3) से क्लोरोफिल-ए के माप सहित ईओएस-06 प्रकीर्णमापी से समुद्री सतह पर हवा की गति और दिशा के प्रेक्षण का विश्लेषण किया।
निष्पक्ष ईएनएसओ स्थितियों को दिखाने वाले जून 2024 और जून 2025 के संयोजनों की तुलना अल नीनो बनने के दौरान जून 2026 के प्रेक्षणों से करने पर सतही क्लोरोफिल-ए में उल्लेखनीय कमी दिखाई देती है। यह कमी समुद्री सतह पर चलने वाली हवाओं की दिशा बदलने के साथ होती है— पूर्व से पश्चिम की ओर चलने वाली हवाओं की जगह पश्चिम से पूरब की ओर चलने वाली हवाएं चलने लगती हैं। हवाओं के इस तरह कमज़ोर पड़ने और दिशा बदलने से पश्चिमी और मध्य भूमध्यवर्ती प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में सामान्य भूमध्यवर्ती उत्प्रवाह बाधित होता है। पोषक तत्वों से भरपूर सतही जल की आपूर्ति में परिणामी कमी सतही क्लोरोफिल-ए में देखी गई गिरावट में परिलक्षित होती है। अप्रैल और जून 2026 के दौरान अधिक क्लोरोफिल वाले क्षेत्र के पश्चिम की ओर फैलाव में आई कमी भी इस बात की पुष्टि करती है कि अल नीनो घटना के विकसित होने के साथ भूमध्यवर्ती उत्प्रवाह कमज़ोर पड़ गया था।
ईओएस-06 के ओसीएम-3 और प्रकीर्णमापी संवेदक से प्राप्त बहु-संवेदक डेटा का यह मिला-जुला उपयोग चल रही अल-नीनो घटना के दौरान भूमध्यवर्ती प्रशांत महासागर में मज़बूत जैवभौतिक जुड़ाव की पुष्टि करता है। अगर अनुमान के अनुसार यह अल-नीनो और तीव्र होता है, तो कम क्लोरोफिल वाला क्षेत्र समय के साथ और स्पष्ट हो सकता है। आने वाले महीनों में भूमध्यवर्ती हवाओं, समुद्री सतह के तापमान, समुद्री जलस्तर की ऊंचाई, तापप्रवणस्तर की गहराई और समुद्री जल के बहाव में होने वाले परिवर्तनों के साथ-साथ इसका और भी विश्लेषण किया जाना चाहिए।
ईओएस-06/ ओशनसैट-3 से प्राप्त प्रेक्षण विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के अनुमानों से भी मेल खाते हैं। जून 2026 के अपने अल नीनो/ला नीना अद्यतन में, डब्ल्यूएमओ ने अनुमान लगाया था कि जून-अगस्त 2026 के दौरान अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना लगभग 80% है, और अनेक पूर्वानुमान मॉडल एक मज़बूत घटना की संभावना की ओर इशारा कर रहे थे। जुलाई के आखिर तक, डब्ल्यूएमओ ने बताया कि अल नीनो की स्थितियाँ तेज़ हो रही थीं और अगस्त-अक्टूबर 2026 के दौरान इसके और मज़बूत होने की उम्मीद थी। ईओएस-06/ ओशनसैट-3 से प्राप्त उपग्रह जानकारी से पता चलता है कि भूमध्यवर्ती प्रशांत महासागर में बन रही अल नीनो स्थितियों के कारण समुद्री उत्पादकता में स्पष्ट तौर पर कमी आई है।
चित्र का विवरण: ईओएस-06/ ओशनसैट-3 ओशन कलर मॉनिटर (ओसीएम-3) और प्रकीर्णमापी डेटा से प्राप्त मासिक औसत क्लोरोफिल-ए (mg/m3) और समुद्र की सतह पर हवा की गति और दिशा (m/s)। ये आंकड़े 2024 और 2025 की तुलना में जून 2026 में पश्चिमी प्रशांत महासागर में अल नीनो के कारण क्लोरोफिल-ए में कमी और हवाओं की दिशा बदलने या उनके कमजोर पड़ने को दर्शाते हैं।