27 मई, 2026
अहमदाबाद स्थित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 के दोहरी आवृत्ति वाले सिंथेटिक एपर्चर रडार (डीएफएसएआर) से प्राप्त प्रेक्षणों का उपयोग करते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में उपसतही बर्फ की विस्तृत जांच की है।
चंद्रयान-2 ऑर्बिटर पर लगा दोहरी आवृत्ति वाले सिंथेटिक एपर्चर रडार (डीएफएसएआर) एल और एस बैंड आवृत्ति में सूक्ष्म-तरंग प्रतिबिंबन उपकरण है और चंद्रमा का अध्ययन करने वाला पहला पूर्णतः ध्रुवणमापी एसएआर है। यह अध्ययन "दोहरे छायांकित क्रेटर्स" पर केंद्रित है, जो चंद्रमा के स्थायी छायादार क्षेत्रों (पीएसआर) के भीतर स्थित विशेष क्रेटर्स हैं। सूर्य के प्रकाश और ऊष्मीय विकिरण से निरंतर परिरक्षण के कारण, ये क्षेत्र अत्यंत ठंडे (तापमान ~25K) रहते हैं और इन्हें लंबे भूवैज्ञानिक कालखंडों में हिम-जल के संरक्षण के लिए अनुकूल स्थान माना जाता है।
उन्नत रडार ध्रुवणमापी विश्लेषण का उपयोग करते हुए, वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में स्थित चार दोहरी छाया वाले क्रेटरों के तल के नीचे उपसतही बर्फ की संभावित उपस्थिति के अनुरूप रडार संकेतों की पहचान की। यह अध्ययन सतह के नीचे बर्फ की पहचान के लिए एक परिष्कृत रडार-आधारित मानदंड प्रस्तावित करता है, जिसमें 1 से अधिक वृत्ताकार ध्रुवीकरण अनुपात (सीपीआर) का मान और 0.13 से कम ध्रुवीकरण की डिग्री (डीओपी) का मान सतह के नीचे बर्फ से जुड़े संभावित आयतनमितीय प्रकीर्णन को इंगित करते हैं। डीओपी एक रडार ध्रुवणमापी प्राचल है जो यह मापता है कि सतह या सतह के नीचे की सामग्री के साथ परस्पर क्रिया करने के बाद परावर्तित रडार संकेत का कितना भाग अपनी मूल ध्रुवीकरण स्थिति को बनाए रखता है। यह दृष्टिकोण वास्तविक बर्फ के संकेतों को खुरदुरे चट्टानी भूभाग द्वारा उत्पन्न रडार संकेतों से अलग करने में मदद करता है।
जांच किए गए क्रेटरों में से, फाउस्टिनी क्रेटर के भीतर स्थित 1.1 किमी व्यास वाले एक क्रेटर में सतह के नीचे बर्फ के विशेष रूप से मजबूत प्रमाण मिलते हैं (चित्र 1), जिनको रडार प्रेक्षणों (चित्र 2) और विशिष्ट लोबेट-रिम आकारिकी विशेषताओं द्वारा सहयोग प्राप्त हैं। लोबेट-रिम आकारिकी प्रवाह-समान या लोबदार उपस्थिति को संदर्भित करती है, जिससे पता चलता है कि इस प्रभाव ने सतह के नीचे की बर्फ को भेद दिया होगा, जिसके कारण लोबेट-रिम क्रेटर बना होगा।
चित्र 1: बायां पैनल: फाउस्टिनी क्रेटर (87.2° दक्षिण, 84.3° पूर्व पर केंद्रित) के शैडो कैम प्रतिबिंबन मोज़ेक, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में स्थित एक स्थायी रूप से छायादार क्षेत्र है, विलियम्स एट अल. 2024 (प्लैनेट. साइंस. पत्रिका 5, 209) से अनुकूलित। दायां पैनल: 1.1 किमी व्यास वाले दोहरे छायादार क्रेटर (87.39° दक्षिण, 82.31° पूर्व पर केंद्रित) का शैडो कैम प्रतिबिंब, जो लोबेट-रिम आकृति और उच्च वृत्ताकार ध्रुवीकरण अनुपात (सीपीआर > 1) तथा निम्न ध्रुवीकरण डिग्री (डीओपी < 0.13) के संयोजन से सुशोभित है।
चित्र 2: चित्र 1 में दर्शाए गए लगभग 1.1 किमी व्यास वाले दोहरे छायादार क्रेटर के लिए चंद्रयान-2 डीएफएसएआर डेटा से प्राप्त सीपीआर मानचित्र। एफ2 फाउस्टिनी क्रेटर के भीतर दूसरे क्रेटर (1100 मीटर व्यास) को दर्शाता है।
ये निष्कर्ष चंद्र ध्रुवीय वाष्पशील पदार्थों के वितरण के बारे में महत्वपूर्ण नई जानकारी प्रदान करते हैं और भविष्य के चंद्र अन्वेषण अभियानों के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखते हैं, जिसमें भविष्य में अवतरण और स्व-स्थाने संसाधन उपयोग (आईएसआरयू) गतिविधियों के लिए संभावित बर्फ-युक्त क्षेत्रों की पहचान शामिल है।
संदर्भ: “ चंद्रयान-2 के दोहरी आवृत्ति वाले सिंथेटिक एपर्चर रडार द्वारा दर्शाए गए दोहरे छायादार क्रेटरों में उपसतही बर्फ ” सिन्हा एट अल., नेचर पोर्टफोलियो जर्नल एनपीजे स्पेस एक्सप्लोरेशन, https://www.nature.com/articles/s44453-026-00038-9