चंद्रयान-3 के अल्फा कण एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर की माप शिव शक्ति बिंदु के संघटन को प्रथम
चंद्र उल्कापिंड एएलएच 81005 से जोड़ती है।
होम
/ चंद्रयान-3 के अल्फा कण एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर की माप शिव शक्ति बिंदु के संघटन को प्रथम
चंद्र उल्कापिंड एएलएच 81005 से जोड़ती है।
03 जुलाई, 2026
23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 लैंडर के सफल मृदु-अवतरण के पश्चात प्रज्ञान रोवर पर लगे अल्फा कण एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एपीएक्सएस) ने चंद्रमा के सामने वाले हिस्से के दक्षिणी उच्च-अक्षांशों 69.37° S, 32.32° पू पर स्थित 'शिव शक्ति बिंदु' पर तत्वों की संरचना को मापा।
एक नए अध्ययन में, अहमदाबाद की भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) के वैज्ञानिकों ने एपीएक्सएस की मापों का विस्तृत भूयांत्रिक विश्लेषण किया। इससे पता चला कि 'शिव शक्ति बिंदु' का भूयांत्रिक संघटन एएलएचए 81005 से काफी मिलता-जुलता है। एएलएचए 81005 एक उल्कापिंड है जिसे 1981-1982 के अभियान के दौरान अंटार्कटिका के एलन हिल्स इलाके में खोजा गया था। चंद्र उल्कापिंडों में एएलएचए 81005 का विशेष महत्व है क्योंकि यह पहला ऐसा उल्कापिंड था जिसे चंद्रमा से आया हुआ माना गया था (चित्र 1)।
चित्र 1: एएलएचए 81005 चंद्र उल्कापिंड की छवि
शिव शक्ति बिंदु का औसत संघटन सजातीय है और प्रेक्षणों से पता चला है कि चंद्र पर्वतीय भूभाग की तुलना में यहाँ की मिट्टी में एल्युमीनियम की मात्रा कम और आयरन व मैग्नीशियम की मात्रा ज़्यादा है (तालिका 1)। इसके अलावा, शिव शक्ति बिंदु पर ओलिविन/पाइरोक्सिन का अनुपात चंद्र के विशिष्ट फेल्डस्पैथिक भूभाग (एफएचटी) की तुलना में ज़्यादा है।
| आक्साइड | इकाई | शिव शक्ति की औसत प्रचुरता | एफएचटी की औसत प्रचुरता | एएलएचए 81005 की औसत प्रचुरता |
|---|---|---|---|---|
| Al2O3 | wt% | 26.1 | 29.6 | 25.8 |
| FeO+MgO | wt% | 14.4 | 8.15 | 13.7 |
| Mg# | mol% | 70 | 65.5 | 73 |
तालिका 1: शिव शक्ति बिंदु, फेल्डस्पैथिक भूभाग (एफएचटी) और चंद्र उल्कापिंड एएलएचए 81005 के बीच रासायनिक संघटन की तुलना।
वैज्ञानिकों ने धरती के विभिन्न क्षेत्रों से एकत्रित 66 चंद्र उल्काओं की चंद्रयान-3 के आंकड़ों से तुलना की। सभी परीक्षित उल्काओं में एएलएचए81005 को शिव शक्ति बिंदु के भू-रासायनिक गुणों से सबसे अधिक सामंजस्य वाला पाया गया। खासकर, ये उल्काएं तथा चंद्रयान-3 के अवतरण स्थल दोनों के गुण फेरोअन एनोरथोसाइस (एफएएन) तथा मैग्निशियम निर्मित चट्टानों के रूप में ज्ञात दो प्रमुख चंद्र चट्टानों के मध्य एक दुलर्भ संघनात्मक स्थान रखते है, जिससे उनकी भू-रासायनिक समानता और अधिक प्रदर्शित होती है। इसके अलावा, दोनों उल्काओं तथा शिव शक्ति बिंदु में अलुमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) और लौह ऑक्साइड (FeO) एवं मैग्निशियम ऑक्साइड (MgO) के मिश्रण की लगभग समान मात्रा विद्यमान है (चित्र-2)। इन प्रेक्षणों का मतलब यह नहीं है कि चंद्र उल्काएं शिव शक्ति बिंदु से प्राप्त हुईं, अपितु यह दर्शाता है कि दोनों में समान रूप से मैग्निशियम बहुल चंद्र परत एवं चट्टान मौजूद हैं।
चित्र-2: चंद्रयान-3, पृथ्वी एवं एफएचटी के विभिन्न क्षेत्रों से एकत्रित चंद्र उल्काओं में Al2O3 तथा MgO+FeO के सांद्रण की तुलना। एएलएचए81005 चंद्र उल्काएं चंद्रयान-3 एपीएक्सएस मापनों के साथ सर्वाधिक भू-रासायनिक समानता दर्शाती है। प्लॉट संकेतः एफएचटीः फील्डस्पैथिक उच्चतर क्षेत्रः एनडब्ल्यूएः उत्तर-पश्चिमी अफ्रीकाः एनईएः उत्तरपूर्वी अफ्रीकाः एसएः दक्षिण अफ्रिका।
तदनंतर भू-रासायनिक विश्लेषण बताता है कि शिव शक्ति बिंदु की मृदा चंद्र पर्पट के विभिन्न स्तरों की सामग्री का एक मिश्रण है। सतह पर न केवल ऊपरी पर्पट की सामग्री दिखाई देती है अपितु मैग्निशियम बहुल चट्टा भी दिखाई देते हैं, जो प्रायः चंद्रमा के नीचले परतों से प्राप्त हुए हैं। शिव शक्ति बिंदु के दक्षिण ध्रुव-ऐटकिन (एसपीए) बेसिन (~350 किमी) की समीपता के मद्देनजर यह संभव है कि एसपीए बेसिन के गठन की घटना के दौरान अंदरूनी परतों की खुदाई से प्राप्त सामग्रियां चंद्रयान-3 अवतरण स्थल की मृदा में मिलाई गई हों।
ये निष्कर्ष पूर्व के एपीएक्सएस अध्यनों से मेल खाते हैं, जिसने चंद्र मैग्मा समुद्र (एलएमओ) की परिकल्पना का समर्थन किया था और अवतरण स्थल पर आच्छादन संबंधी सामग्रियों की उपस्थिति के बारे में बताया था।
संक्षेप में, यह चंद्रयान-3 एपीएक्सएस मापनों तथा चंद्र उल्काओं के अभिलेख बीच अंतर संबंध स्थापित करने हेतु किया गया एक अग्रणी वैज्ञानिक अध्ययन है। चंद्रयान-3 मिशन ने शिव शक्ति बिदु को चंद्रमा के प्रथम ज्ञात उल्का के साथ, जोड़कर प्राचीन चंद्र पर्पट की संरचना को समझने हेतु नए अवसर प्रदान किए हैं।
संदर्भः द्विजेश रे, ऋषितोष के. सिन्हा,
संतोष वी. वडावाले, एम. षणमुगम और अनिल भारद्वाज द्वारा लिखित “चंद्रयान-3
एपीएक्सएस माप से चंद्रमा के पर्वतीय इलाकों की संरचना में विविधता और
उल्कापिंडों से संबंध का पता चलता है”, एनपीजे अंतरिक्ष अन्वेषण, वॉल्यूम 2,
आर्टिकल #25, और यह यहाँ उपलब्ध है:
https://www.nature.com/articles/s44453-026-00041-0
https://doi.org/10.1038/s44453-026-00041-0