अंतरिक्ष विभाग की उपलब्धियां –2025
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29 जनवरी, 2026

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए वर्ष 2025 एक रोमांचक और चुनौतीपूर्ण वर्ष रहा, जिसमें हमने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं। 2025 में, हमने लगभग 231 उपलब्धियाँ हासिल कीं, जिनमें मिशन, भू परीक्षण, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और अंतरिक्ष से संबंधित सभी गतिविधियाँ शामिल हैं।साथ ही,12 रोहिणी प्ररिज्ञापी रॉकेट उड़ानें भी शामिल हैं। प्रत्येक उपलब्धि के साथ विभाग ने अपनी उत्कृष्टता, विरासत और उत्कृष्ट टीम वर्क को साबित किया।

(क) मिशन

हमने 2025 में बहुत महत्वपूर्ण मिशन संचालित किए एवं प्रत्येक मिशन से कुछ न कुछ अनूठी उपलब्धि अर्जित की।

  • स्पेडेक्स मिशन ने उपग्रहों के बीच स्वायत्त डॉकिंग और अनडॉकिंग के साथ-साथ विद्युत हस्तांतरण का सफल प्रदर्शन किया - यह अंतरिक्ष केंद्रों पर डॉकिंग प्रचालन और कक्षीय सेवा प्रदान करने की क्षमताओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्पेडेक्स उपग्रहों की सफल परिक्रमा ने इस उपलब्धि को और भी पुष्ट किया। इस उपलब्धि के साथ भारत अंतरिक्ष में डॉकिंग का प्रदर्शन करने वाला चौथा देश बन गया।
  • पीएसएलवी कक्षीय प्रयोगात्मक मॉड्यूल (पीओईएम-04), जो पीएसएलवी-सी60/स्पेडेक्स मिशन का भी हिस्सा था, उसने इसरो, अंतरिक्ष स्टार्टअप और शिक्षाजगत के कई नीतभारों के साथ उड़ान भरी, जिससे कक्षीय प्रयोगों के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा मिला। पीओईएम-4 ने 1000 से अधिक परिक्रमाएँ पूरी कीं और यह एक अत्यंत सफल पीओईएम मिशन था। इस मिशन ने कक्षा में रोबोटिक आर्म का प्रदर्शन और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में बीजों के अंकुरण को भी प्रदर्शित किया।
  • जनवरी 2025 में जीएसएलवी-एफ15/एनवीएस-02 मिशन श्रीहरिकोटा से प्रमोचित होने वाला 100वां मिशन था। प्रमोचन यान ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में सटीक रूप से स्थापित किया।
  • जीएसएलवी-एफ16/निसार मिशन ने इसरो-नासा के प्रथम संयुक्त मिशन के रूप में एक और उपलब्धि हासिल की। यह महत्वपूर्ण है कि भू प्रेक्षण क्षेत्र के सबसे महंगे नीतभार में से एक, नासा के 12 मीटर के खुलने योग्य एंटीना को एक भारतीय उपग्रह बस में एकीकृत कर एक भारतीय प्रमोचन यान द्वारा प्रमोचित किया गया।
  • दोहरी आवृत्ति वाला प्रथम एसएआर उपग्रह, निसार, नासा के एल-बैंड एसएआर नीतभार और इसरो के एस-बैंड एसएआर नीतभार के साथ अब पूरी तरह से प्रचालित है।
  • एलवीएम3-एम5 / सीएमएस-03 मिशन एक और अनूठा मिशन है जिसमें हमने भारतीय धरती से सबसे भारी जीटीओ उपग्रह की उपलब्धि हासिल की।
  • एलवीएम3-एम6 / ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 ने भारतीय धरती से अब तक के सबसे भारी उपग्रह के प्रमोचन का रिकॉर्ड बनाया। इस मिशन ने सी25 चरण के लिए संयुक्त प्रणोद फ्रेम और नीतभार क्षमता को 176 किलोग्राम तक बढ़ाने वाले अन्य संशोधनों के साथ-साथ एस200 मोटर के लिए इलेक्ट्रो-मैकेनिकल प्रवर्तन की भी पुष्टि की। हम विश्वासपूर्वक कह सकते हैं कि एस200 ईएमए, ठोस मोटरों के लिए ईएमए का उपयोग करने वाले अन्य प्रमोचकों की तुलना में विश्व स्तर पर सबसे शक्तिशाली अंतरिक्ष-योग्य विद्युत प्रवर्तन प्रणाली है।
  • 10 मिशनों में से (5 प्रमोचन यान, 5 अंतरिक्ष यान, जिसमें एक वाणिज्यिक अंतरिक्ष यान भी शामिल है), 7 मिशन सफल रहे।
  • हमारी अंतरिक्ष संपत्तियों ने नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा के लिए निरंतर सेवाएं प्रदान करके बहुत बड़ा योगदान दिया है।

(ख) प्रौद्योगिकी प्रदर्शन परीक्षण

  • इस वर्ष, स्वदेशी सेमीक्रायोजेनिक इंजन के परीक्षण में एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई और उड़ान के दौरान क्रायोजेनिक इंजन प्रणोद कक्ष के पुनः प्रज्वलन का प्रदर्शन किया गया। एक संबंधित भू परीक्षण में, सीई-20 इंजन को बूटस्ट्रैप मोड में प्रज्वलित किया गया, जिससे भविष्य के मिशनों में मिशन के लचीलेपन के लिए पुनः आरंभ करने योग्य क्रायोजेनिक चरण का मार्ग प्रशस्त हुआ। संभवतः यह विश्व में पहली बार है जब गैस जनरेटर चक्र इंजन का बूटस्ट्रैप मोड में परीक्षण किया गया है।
  • इसरो ने ऊधर्वधारउत्थापनऔरऊधर्वधारअवतरण विधा में चरण पुनः प्राप्ति के प्रदर्शन के लिए विकास इंजन की पुनः प्रारंभ क्षमता का भी प्रदर्शन किया और उपग्रह तथा कार्बन-कार्बन नोजल के साथ पीएस4 इंजन के परीक्षण भी किए।
  • उच्च प्रणोद वाले विद्युत नोदन प्रणाली ने 1000 घंटे के संचयी प्रचालन का प्रदर्शन किया है, और हम टीडीएस-01 उपग्रह में शामिल करने और उसे प्रभावी ढंग से स्थापित करने के अंतिम चरण में हैं।
  • एसएसएलवी यान के तीसरे चरण, एसएस3 मोटर का स्थैतिक परीक्षण 30 दिसंबर, 2025 को एसडीएससी, श्रीहरिकोटा से 108 सेकंड की अवधि के लिए सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। एसएस3 ठोस मोटर चरण, इसरो द्वारा निर्मित पहला कार्बन—इपॉक्सी ठोस मोटर केस है, जिसने चरण के द्रव्यमान को काफी कम कर दिया है, जिससे एसएसएलवी की नीतभार क्षमता में 90 किलोग्राम का सुधार हुआ है।

(ग) गगनयान कार्यक्रम

  • इस वर्ष गगनयान कार्यक्रम को गति देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। गहन निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय समीक्षा समिति का गठन किया गया और दस्तावेजों का व्यापक शून्य-आधारित ऑडिट किया गया। केंद्रों में उपलब्ध दक्षता के आधार पर ईसीएलएसएस की संगठनात्मक संरचना में आवश्यक परिवर्तन भी किए गए।
  • हम प्रथम मानवरहित मिशन के अंतिम चरण में हैं। मानव अनुकूलन हेतु सभी नोदन परीक्षण पूरे हो चुके हैं। परीक्षण स्थलों पर कई सॉफ्टवेयर अनुरूपण चल रहे हैं और हमें निर्धारित समय-सारणी के अनुसार प्रथम मानवरहित मिशन को सफलतापूर्वक शुरू करने के लिए इन अनुरूपण और पर्यावरणीय परीक्षणों को जल्द से जल्द पूरा करना होगा। अब तक, विभिन्न संरचनात्मक योग्यता परीक्षणों सहित 8000 से अधिक भू परीक्षण पूरे हो चुके हैं।
  • एक एकीकृत मिशन समीक्षा समिति का गठन किया गया है, जो अधिक मजबूत मिशन रणनीति की दिशा में डिजाइन और अनुरूपण संबंधी कमियों को दूर करने के लिए सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच कर रही है।
  • एक्सिओम-4 मिशन के माध्यम से दूसरा भारतीय अंतरिक्ष में पहुँचा और ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला आईएसएस तक पहुंचने वाले प्रथम भारतीय बने, जो गगनयान कार्यक्रम के लिए हमारी समग्र तैयारियों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस मिशन के बाद शुभांशु शुक्ला घर-घर में जाना-पहचाना नाम बन गए और इसरो आईएसएस पर प्रशिक्षण, मिशन प्रोटोकॉल और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण प्रयोगों के संचालन में उनके अनुभव का भरपूर लाभ उठा रहा है।
  • फाल्कन-9 के बूस्टर चरण में एलओएक्स भरण रेखा में रिसाव पाए जाने पर इसरो का अनुभव अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ। इसरो की उच्च स्तरीय टीम द्वारा किए गए त्वरित हस्तक्षेप से चारों अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई और उन्होंने आईएसएस का सफल मिशन पूरा किया।
  • एक्सिओम-4 मिशन की सफलता ने हमारे गगनयात्रियों की सम्पूर्ण मानव-अनुकूलित मिशन के लिए तत्परता को भी प्रमाणित किया। इसके अतिरिक्त, मिशन के दौरान, गगनयात्री ने भारतीय अनुसंधान संस्थानों द्वारा परिकल्पित सात सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण प्रयोगों को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिनके महत्वपूर्ण परिणाम प्राप्त हुए।
  • प्रथम एकीकृत एयर ड्रॉप परीक्षण में कर्मीदल मॉड्यूल में पैराशूट की संपूर्ण तैनाती और समुद्र से उसकी पुनर्प्राप्ति को प्रमाणित किया गया। अगला परीक्षण इस महीने के अंत तक तैयार हो जाएगा। गगनयान के लिए ड्रोग पैराशूट की तैनाती का प्रदर्शन करने के लिए चंडीगढ़ में भी परीक्षण किए गए।

(घ) अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार और गैर-सरकारी कंपनियों को ठोस सहयोग प्रदान करना

अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार के तहत, अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) देश में गैर-सरकारी कंपनियों (एनजीई) की गतिविधियों को इन-स्पेस के माध्यम से सहयोग प्रदान कर रहा है। ये अंतरिक्ष स्टार्टअप अपने परीक्षणों और प्रणाली संबंधी आवश्यकताओं के लिए इसरो की सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं। 40 गतिविधियां पूरी हो चुकी हैं और लगभग 34 या तो प्रक्रियारत हैं या उन पर चर्चा चल रही है।

  • अंतरिक्ष स्टार्टअप द्वारा विकसित प्रमोचन यान के प्रथम चरण के ठोस मोटर को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी), श्रीहरिकोटा में तैयार किया गया। एसडीएससी में प्रथम और द्वितीय चरण के मोटरों के स्थैतिक परीक्षण किए गए। इस यान का प्रथम कक्षीय प्रमोचन इस वर्ष के आरंभ में होने की उम्मीद है।
  • एचएएल के साथ एसएसएलवी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं और 2 वर्षों में विकासात्मक उड़ान का लक्ष्य रखा गया है। भू प्रेक्षण के लिए 12 उपग्रहों के समूह हेतु एक संघ के साथ सरकारी-निजी भागीदारी समझौता संपन्न हुआ है।
  • पहली बार किसी निजी उद्योग की कंपनी को संचार उपग्रह बनाने और तैनात करने की अनुमति दी गई है।

(ङ) अनुप्रयोग

  • अनुप्रयोगों के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गईं। विभाग ने आपदा प्रबंधन सहायता प्रदान करना जारी रखा और विभिन्न मंत्रालयों के लिए अनेक भू-स्थानिक समाधान भी विकसित किए। माननीय प्रधानमंत्री के सुझाव पर, विभाग ने इसरो द्वारा अब तक प्रमोचित किए गए सभी उपग्रहों के उपयोग का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया है।
  • आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए एकीकृत नियंत्रण कक्ष (आईसीआर-ईआर) का उद्घाटन माननीय केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा 16 जून 2025 को किया गया, जिसके लिए एनआरएससीने एनडीईएम5.0 उपलब्ध कराया, जो इसका मुख्य आधार है। तड़ित मानसदर्शनपोर्टल लगभग वास्तविक समय के डेटा का उपयोग करके प्रचालित किया गया है, जो प्रति घंटा और दैनिक दर पर बिजली गिरने की घटनाओं की जानकारी प्रदान करता है। मणिपुर सरकार के लिए एनईसैक द्वारा एक वन संसाधन और विश्लेषण प्रणाली विकसित की गई। राष्ट्रीय स्तर का ग्रिड डिजिटल डाक सूचकांक संख्या (डिजीपिन) और विशिष्ट पता पहचान प्रणाली डाक डिजिटल पता कोड (पीडीएसी) विकसित की गई।
  • हमने देश में आई सभी प्रमुख बाढ़ों का मानचित्रण किया है और 21 राज्यों के लगभग 300 बाढ़ मानचित्र वितरित किए गए हैं। देश के लिए एक लवण क्षेत्र एटलस और मृदा संपदा एटलस संकलित किया गया है। पंजाब और हरियाणा में धान की पराली जलाए गए क्षेत्रों का मानचित्रण किया गया है।

(च) बुनियादी ढांचे का विकास

इस वर्ष कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को या तो मंजूरी मिली या उनका संचालन शुरू हो गया।

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लगभग 4000 करोड़ रुपये की लागत से तृतीय प्रमोचन पैडपरियोजना को मंजूरी प्रदान की। कुलशेखरपट्टिनम स्थित एसएसएलवी प्रमोचन परिसर में प्रमोचन पैडसुविधा सहित सिविल कार्य शुरू हो गए हैं और अगस्त 2026 तक इसको तैयार करना और इस सुविधा से इस वर्ष के अंत तक कक्षीय प्रमोचन कालक्ष्य है।
  • ठोस मोटरों के लिए स्वदेशी 10 टन क्षमता वाला प्रणोदक मिक्सर संस्थापितकिया गया है, जो ठोस मोटर ढलाई के लिए उच्च उत्पादन क्षमता को सक्षम करने हेतुराष्ट्र में सबसे अधिक क्षमता वाला है। हमने ठोस प्रणोदक प्रसंस्करणके लिए आवश्यक अमोनियम परक्लोरेट के उत्पादन को दोगुना करने के लिए अमोनियम परक्लोरेट संयंत्र में दूसरी प्रसंस्करणलाइन भी संस्थापित कर दी गई है।
  • तुमकुर में नए एकल प्रनोदक परीक्षण सुविधा सहित टाइटेनियम मिश्र धातु टैंकों के लिए अत्याधुनिक विनिर्माण सुविधा का उद्घाटन किया गया। इसी प्रकार, क्रायोजेनिक टर्बोपंप परीक्षण सुविधा और नई उपग्रह प्रणोदक परीक्षण सुविधा का भी इस वर्ष उद्घाटन किया गया है।
  • आरएलवी कार्यक्रम के लिए अत्याधुनिक अवतरण गियर पातन परीक्षण सुविधा का उद्घाटन किया गया, यह देश की एकमात्र ऐसी सुविधा है जो वास्तविक रनवे सतह का अनुकरण करती है।

(छ) अंतरिक्ष विज्ञान

  • इस वर्ष, देश में अंतरिक्ष विज्ञान संबंधी गतिविधियों को केंद्रित और निर्देशित करने के लिए एक अलग अंतरिक्ष विज्ञान और खगोल विज्ञान शीर्ष बनाया गया है।
  • चंद्रयान 4, चंद्रयान 5 और शुक्र कक्षीय मिशन से संबंधित कई राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किए गए और देश में अंतरिक्ष विज्ञान के लिए उपयोगकर्ताओं का एक बढ़ता हुआ समुदाय है।
  • चंद्रयान-2, चंद्रयान-3, आदित्य-एल1, एक्सपोसैट और एस्ट्रोसैट मिशन द्वारा चंद्र/सौर वातावरण में नई खोजों और अध्ययनों के लिए वैज्ञानिक डेटा प्रदान करना जारी है।

(ज) अन्य विभागों के साथ सहयोग

  • समुद्रयान कार्यक्रम जैसी अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में भी इसरो की विशेषज्ञता का उपयोग किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य समुद्र की 6 किलोमीटर तक की गहराई का अन्वेषण करना है। इसरो कर्मियों से संबंधित जरूरतों को पूरा कर रहा है और पूर्ण पैमाने पर वेल्डिंग का काम प्रगति पर है।
  • हम चंद्रयान और मंगल मिशनों के लिए आरएचयू और आरटीजी आवश्यकताओं हेतु परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के साथ सहयोग कर रहे हैं, जिसके लिए डीएई के सचिव और उनकी टीम के साथ एक बैठक आयोजित की गई थी। हैदराबाद स्थित परमाणु ईंधन परिसर में इसरो द्वारा वित्त पोषित नाइओबियम उत्पादन संयंत्र का संचालन शुरू किया गया। भविष्य के मिशनों के लिए परमाणु नोदन के विकास पर भी चर्चा हुई।
  • इसरो और सीएसआईआर ने एक अंतरिक्ष सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें गगनयान कार्यक्रम में सहयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई।
  • अंतरिक्ष चिकित्सा में सहयोग के लिए श्री चित्रा तिरुनाल आयुर्विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के साथ प्राधार समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के साथ समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप दे दिया गया है और जनवरी 2026 में इस पर हस्ताक्षर किए जाने की योजना है।
  • डीआरडीओ के सहयोग से विकसित अंतरिक्ष खाद्य पदार्थों को एक्सिओम-4 मिशन के तहत सफलतापूर्वक आईएसएस में पहुंचाया गया।

(झ) मुख्य आयोजन

इस वर्ष विभाग द्वारा तीन प्रमुख कार्यक्रमों का आयोजन किया गया और एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भी अग्रणी भूमिका निभाई गई।

  • मई 2025 में भारत में आयोजित ग्लेक्स 2025 एक बड़ी सफलता रही और इस आयोजन ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के बढ़ते नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जिसमें 36 देशों के 1500 प्रतिभागियों ने भाग लिया। हमें 57 देशों से रिकॉर्ड 1275 शोध पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 44% छात्रों के थे - जो अंतरिक्ष अन्वेषण में बढ़ती रुचि का एक सच्चा संकेत है।
  • माननीय प्रधानमंत्री के सुझाव पर, इस वर्ष "अंतरिक्ष विजन 2047 का क्रियान्वयन और 2047 से परे देखना" विषय पर एक डीओएस चिंतन शिविर आयोजित किया गया और इस विषय पर 11 प्रभावक्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया गया।
  • राष्ट्रीय सम्मेलन 2.0 का आयोजन वर्ष 2015 में हुए प्रथम सम्मेलन के 10 वर्ष बाद माननीय प्रधानमंत्री के निर्देशों पर किया गया। इसका विषय था 'विकसित भारत 2047 के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अनुप्रयोगों का लाभ उठाना'।केवल 3 महीनों में 63 सहयोगी मंत्रालयों/विभागों और 36 राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ 300 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं। बैठकों के दौरान प्राप्त सहयोगी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 2040 तक के लिए एक मिशन दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं।
  • द्वितीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस नई दिल्ली में मनाया गया और इस अवसर पर अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के साथ एक संवाद सत्र आयोजित किया गया। देश के 7 क्षेत्रों में 125 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 750 विद्यालयों और संस्थानों के 1.5 लाख छात्रों और 15000 शिक्षकों ने भाग लिया।

(ञ) क्षमता निर्माण एवं जनसंपर्क

इस वर्ष हमारी क्षमता निर्माण और जनसंपर्क गतिविधियों में भी काफी विस्तार हुआ है।

  • “अंतरिक्ष पर पूर्वोत्तर छात्रों के जागरूकता, पहुंच तथा ज्ञान कार्यक्रम (एनई-स्पार्क्स) कार्यक्रम” के माध्यम से भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र के 8 राज्यों के 786 विद्यार्थियों (378 लड़के और 408 लड़कियां) को अंतरिक्ष और विज्ञान की दुनिया से परिचित कराया गया है। हमारे वार्षिक युविका कार्यक्रम काफी सराहे जाते हैं और इनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी भाग लेते हैं। इस वर्ष जागृति यात्रा के अंतर्गत 580 विद्यार्थियों ने एसडीएससी का दौरा किया।
  • हाल ही में इसरो का शिक्षा जगतसंपर्क कार्यक्रम पूरे देश के सभी राज्यों में आयोजित किया गया। 41 नए गैर-सरकारी संगठनों/स्टार्टअप/संस्थानों को इसरो द्वारा पंजीकृत अंतरिक्ष प्रशिक्षक के रूप में चुना गया है। इस वर्ष स्कूली शिक्षकों को सशक्त बनाने के लिए लगभग 4000 शिक्षकों के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
  • विभाग ने विद्यालय और महाविद्यालय स्तर के छात्रों को लक्षित करते हुए, जागरूकता और कौशल विकास के उद्देश्य से एक पुस्तक लेखन अभियान शुरू किया है औरहमारा लक्ष्य 2026 तक कम से कम 75 पुस्तकें प्रकाशित करना है।
  • एनआईटी, राउरकेला में एक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विकास केंद्र का उद्घाटन किया गया और शैक्षणिक सहयोग के लिए अंतरिक्ष में अनुसंधान क्षेत्र 2025नामक एक दस्तावेज जारी किया गया।
  • अंतरिक्ष शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, सहयोग और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत को एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करने हेतु अंतरिक्ष विभाग के अधीन भारत में वैश्विक अंतरिक्ष संस्थान की स्थापना की योजना बनाई गई है।

(ट) सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता

सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बहुत महत्व देती रही है। हम इस क्षेत्र में पीछे नहीं हैं और हमने महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक घटकों में आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन किया है।

  • अंतरिक्ष अनुप्रयोगों में उपयोग के लिए अर्हक32-बिट विक्रम प्रोसेसर, प्रथम 32-बिट प्रोसेसर, जिसे इसरो ने एससीएल के साथ मिलकर विकसित किया है, उसे सितंबर में सेमीकॉन इंडिया 2025 कार्यक्रम के दौरान माननीय प्रधानमंत्री को प्रस्तुत किया गया था।
  • आरएफ गैलियम नाइट्राइड हाई इलेक्ट्रॉन मोबिलिटी ट्रांजिस्टर के निर्माण के लिए एक स्वदेशी 250 एनएम प्रक्रिया प्रौद्योगिकी विकसित की गई थी।
  • नाविक और अन्य जीएनएसएस संकेतों को सहयोग प्रदान करने के लिए एक स्वदेशी बेसबैंड एएसआईसी को 28एनएम तकनीक पर विकसित किया गया है, जिसका उपयोग सिविल और रणनीतिक मंचों पर किया जा सकता है।

(ठ) अंतरराष्ट्रीय सहयोग

  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में, हमने 10 अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ विभिन्न प्रकार के समझौते किए हैं, लगभग 125 द्विपक्षीय बैठकें और 75 बहुपक्षीय बैठकें आयोजित की हैं, और लगभग 32 विदेशी गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिनिधिमंडलों ने इसरो का दौरा किया है। भारत ने ब्रिक्स की अध्यक्षता भी ग्रहण कर ली है। पहले से ही प्रमोचित निसार और आगामी सहयोगी मिशन जैसे जी20 उपग्रह, तृष्णा और लूपेक्स, भारत को प्रमुख वैश्विक मिशनों में एक अधिमानित भागीदार के रूप में स्थापित कर रहे हैं।

(ड) पुरस्कार एवं मान्यता

  • इस वर्ष अंतरिक्ष विभाग को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 23 पुरस्कार प्राप्त हुए, जिनमें आईएए वॉन कर्मन पुरस्कार 2025, चंद्रयान-3 के अवतरण के लिए एआईएए गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स पुरस्कार, इतालवी एयरोस्पेस उद्योग संघ द्वारा ब्रोग्लियो पुरस्कार, विज्ञान श्री पुरस्कार 2025, राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025, एएसआई और राष्ट्रीय भू-स्थानिक पुरस्कार 2025 जैसे प्रमुख पुरस्कार शामिल हैं। अंतरिक्ष विभाग को राजभाषा हिंदी के सर्वोत्तम क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2024-25 का राजभाषा कीर्ति पुरस्कार (द्वितीय पुरस्कार) भी प्रदान किया गया। यह पुरस्कार राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राजभाषा विभाग द्वारा दिया जाता है।