इसरो के स्क्रैमजेट इंजन प्रौद्योगिकी प्रदर्शक का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया गया

आज, उपग्रहों को कक्षा में बहु-चरण उपग्रह प्रक्षेपण वाहनों से, जिन्हें केवल एक बार (उपभोजित) इस्तेमाल किया जा सकता है, प्रमोचन किया जा रहा है। ये प्रक्षेपण वाहन प्रणोद उत्पन्न करने के लिए ईंधन के साथ-साथ ऑक्सीडाइजर को दहन हेतु ले जाते हैं । एक बार इस्तेमाल के लिए डिजाइन किए प्रमोचन वाहन महंगे होते हैं और उनकी क्षमता कम होती है, क्योंकि वे अपने उत्थापन द्रव्यमान के केवल 2-4% ले जा सकते हैं। इसलिए, पूरे दुनिया भर में लांच लागत को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

आज के प्रक्षेपण वाहन के द्वारा ले जाने वाले ऑक्सीडाइजर में लगभग 70% प्रणोदक (ईंधन ऑक्सीडाइजर संयोजन) होते हैं। इसलिए, अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण वाहन की प्रणोदन प्रणाली ऐसी होगी जो वायुमंडल से उड़ान के दौरान वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग करेंगे, जिससे कि उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने के लिए अपेक्षित कुल प्रणोदक की मात्रा बहुत ही कम होगी ।

इसके अलावा, अगर उन वाहनों को पुनःउपयोगी बनाया जाए, इससे उपग्रहों के प्रमोचन के लागत में और कमी आएगी। इस प्रकार, वायुश्वसन प्रणोदन के साथ-साथ भविष्य में पुनःउपयोगी प्रक्षेपण यान अवधारणा से, कम कीमत पर अंतरिक्ष में नियमित पहुंच, एक रोमांचक बात है।

वायुश्वसन लेने की प्रौद्योगिकी के सामरिक प्रकृति को देखते हुए, जो प्रक्षेपण यान के डिजाइन में महत्वपूर्ण बदलाव लाने की क्षमता है, दुनिया भर में वायुश्वसन लेने वोले इंजनों की प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। रैमटेट, स्क्रैमजेट और द्वि मोड रैमटेट (DMRJ) वायुश्वसन इंजीनों के लिए तीन अवधारणाएं हैं जिन्हें विभिन्न अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा विकसित किया जा रहा है ।

रैमटेट वायुश्वसन जेट इंजन का रूप है जो वाहन की अग्र गति का उपयोग कर आने वाली हवा को बिना घूर्णन संपीडक के दहन के लिए संपीडन करता है । ईंधन को दहन कक्ष में अंतक्षेपण किया जाता है जहां वह गर्म संपीड़ित हवा के साथ मिलकर प्रज्वलित होता है । रैमटेट चालित वाहन को सहायता प्राप्त उत्प्रस्थान चाहिए जैसे राकेट के लिए सहायता त्वरित गति के लिए आवश्यक है, जहां प्रणोद उत्पन्न करना होता है ।

रैमटेट  सुपरसोनिक गति लगभग माख 3(ध्वनि की गति से तीगुणा) में सबसे अधिक कुशलता से काम करते हैं और माख 6 की गति तक संचालित कर सकते हैं । हालांकि, जब वाहन हाइपरसोनिक गति तक पहुँच जाता है तो रैमटेट की दक्षता कम होने लगती है।

स्क्रैमजेट इंजन रैमटेट इंजन का सुधारित रूप है जोकि कुशलता से हाइपरसोनिक गति में प्रचालित होता है और सुपरसोनिक दहन की अनुमति देता है। इसलिए यह सुपरसोनिक दहन रैमटेट, या स्क्रैमजेट के रूप में जाना जाता है।

द्वि मोड रैमटेट (DMRJ) जेट इंजन का एक प्रकार है, जहां रैमटेट स्क्रैमजेट में बदल कर माख 4-8 रेंज में, यह कुशलतापूर्वक दोनों सबसोनिक और सुपरसोनिक दहन मोड में काम कर सकता है ।

इसरो की वायुश्वसन प्रणोदन परियोजना (ABPP) का महत्वपूर्ण विकास 28 अगस्त, 2016, को स्क्रैमजेट का सफल उड़ान परीक्षण रहा।

इसरो के स्क्रैमजेट इंजन का वायुश्वसन प्रणोदन प्रणाली की प्राप्ति की दिशा में यह पहला प्रायोगिक मिशन सफलतापूर्वक सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र शार, श्रीहरिकोटा से आयोजित किया गया।

12 घंटे की बाधारहित उल्टी गिनती के बाद, स्क्रैमजेट इंजन को वहन करने वाले ठोस रॉकेट बूस्टर का 0600 बजे (6:00 बजे) आईएसटी पर उत्थापन किया गया। महत्वपूर्ण उड़ान घटनाएं, अर्थात्, बूस्टर रॉकेट चरण का ज्वलन, दूसरे चरण के ठोस रॉकेट का प्रज्वलन, 5 सेकंड के लिए स्क्रैमजेट इंजन का क्रियान्वयन उसके अनुवर्ती में  दूसरे चरण का ज्वलन, योजना के अनुसार ही रहें ।

300 सेकंड की उड़ान के बाद, श्रीहरिकोटा से लगभग 320 किलोमीटर पर वाहन बंगाल की खाड़ी में उतरा। श्रीहरिकोटा के भू केंद्रों से वाहन का उड़ान के दौरान सफलतापूर्वक अनुवर्तन किया गया था।

इस उड़ान के साथ, क्रांतिक प्रौद्योगिकियां जैसे सुपरसोनिक गति में वायुश्वसन इंजन का प्रज्वलन, सुपरसोनिक गति में लौ का जारी रहना, हवा का अंतर्ग्रहन तंत्र और ईंधन अंतक्षेपण प्रणालियों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया है। इसरो द्वारा डिजाइन किए स्क्रैमजेट इंजन ने हाइड्रोजन का ईंधन के रूप में और वायुमंडलीय हवा से ऑक्सीजन का ऑक्सीडाइजर के रूप में उपयोग किया है। अगस्त 28 का परीक्षण माख 6 का हाइपरसोनिक उड़ान के साथ इसरो के स्क्रैमजेट इंजन की पहली छोटी अवधि का प्रायोगिक परीक्षण है । इसरो का उन्नत प्रौद्योगिकी वाहन (एटीवी), जो एक उन्नत परिज्ञापी रॉकेट है सुपरसोनिक स्थिति में स्क्रैमजेट इंजन का हाल ही में किया परीक्षण में ठोस बूस्टर रॉकेट का उपयोग किया था । एटीवी से वहन किया स्क्रैमजेट इंजन का उत्थान के समय वजन 3277 किलोग्राम था ।

एटीवी दो चरण स्पिन स्थिर लांचर है समान ठोस मोटर्स के साथ (रोहिणी RH560 परिज्ञापी रॉकेट के आधार पर) पहले तथा साथ ही दूसरे चरण (बूस्टर और पोषित्र) में है। दूसरे चरण की पृष्ठ भाग में जुड़वे स्क्रैमजेट इंजन को लगाया गया था । जब दूसरे चरण का इंजन वांछित स्थिति को प्राप्त करता है "प्रारंभ", के आवश्यक कार्रवाई कर स्क्रैमजेट इंजन प्रज्वलित किया गया और उसने 5 सेकंड के लिए कार्य किया। एटीवी उड़ान संचालन पूर्व क्रमादेशित क्रम पर आधारित थे।

इसरो ने स्क्रैमजेट इंजन के विकास के दौरान कुछ तकनीकी चुनौतियां जिनमें हाइपरसोनिक इंजन वायु अंतर्ग्रहन का डिजाइन और विकास, सुपरसोनिक दहन यंत्र, अति उच्च तापमान बर्दाश्त करने वाले सामग्री का विकास, परिकल्पनात्मक उपकरणों का अनुकरण सुपरसोनिक प्रवाह, उड़ान गति में विस्तृत रेंज इंजन का निष्पादन और प्रचालन सुनिश्चित करना, उचित तापीय प्रबंधन और इंजीनों का भू परीक्षण पूरा किया है ।

भारत स्क्रैमजेट इंजन के उड़ान परीक्षण का प्रदर्शन करने वाला चौथा देश है।