अंतरिक्ष विज्ञान एवं अन्वेषण

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में खगोल विज्ञान, ताराभौतिकी, ग्रहीय विज्ञान एवं भू विज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान एवं सैद्धांतिक भौतिक विज्ञान जैसे क्षेत्रों के अनुसंधान शामिल हैं। बलून, परिज्ञापी राकेट, अंतरिक्ष आधार और भू-आधारित सुविधाएं इन अनुसंधान प्रयासों में सहायक हैं। परिज्ञापी राकेटों की श्रृंखला वायुमंडलीय प्रयोगों हेतु उपलब्धए हैं। विभिन्नं वैज्ञानिक उपकरण उपग्रहों पर विशेषकर, खगोलीय एक्सं-किरण एवं गामा किरण प्रस्फुवटों को दिशा देने हेतु प्रक्षेपित किए गए हैं।

एस्ट्रोसैट

एस्ट्रोयसैट प्रथम समर्थित भारतीय खगोलीय मिशन है। जिसका लक्ष्यक एक्सम–किरण, प्रकाशिक एवं यू.वी. स्पेरक्ट्रनम बैण्डों में एक साथ खगोलीय स्रोतों का अध्य यन करना है। इन नीतभारों में पराबैंगनी (दूर एवं समीप), सीमित प्रकाशिक एवं एक्सख-किरण क्षेत्र (0.3 के.ई.वी. से 100 के.ई.वी. तक) के ऊर्जा बैंड शामिल हैं। एस्ट्रोरसैट मिशन का एक अद्वितीय गुण यह है कि यह एक उपग्रह के साथ विभिन्नथ खगोलिकीय वस्तु)ओं के एक ही साथ बहु-तरंगदैर्घ्यए प्रेक्षणों में सहायक है।

1515 कि.ग्रा. के उत्था2पन के साथ एस्ट्रोासैट, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से पी.एस.एल.वी.-सी30 द्वारा भूमध्यै रेखा से 6 डिग्री के कोण की आनति पर 650 कि.मी. की कक्षा में 28 सितंबर, 2015 को प्रमोचित किया गया था। एस्ट्रो सैट मिशन की न्यूडनतम उपयोगी कालावधि 5 वर्ष है।

मंगल कक्षित्र मिशन

मंगल कक्षित्र मिशन 80,000 कि.मी. तक 372 कि.मी. की दीर्घवृत्ती य कक्षा में मंगल ग्रह की परिकर्मी करने हेतु डिजाइन किए गए कक्षित्र यान के साथ मंगल ग्रह के लिए प्रथम अंतरग्रहीय मिशन है। मंगल कक्षित्र मिशन को क्रांतिक मिशन प्रचालनों एवं अंतरिक्षयान की नोदन संचार एवं अन्य बस प्रणालियों पर महत्विपूर्ण आवश्यतकताओं को ध्यारन में रखते हुए चुनौतीपूर्ण प्रौद्योगिकी मिशन एवं विज्ञान मिशन कहा जा सकता है। मिशन का मुख्यत प्रेरक प्रौद्योगिकी उद्देश्यन भूमि आधारित युक्ति कौशल (ई.बी.एम.) मंगल ग्रहीय अंतरण प्रक्षेपपथ (एम.टी.टी.) एवं मंगल कक्षा अंत:क्षेपण (एम.ओ.आई.) चरणों की क्षमता के साथ अंतरिक्षयान की डिजाइन एवं निर्माण करना तथा लगभग 400 मिलियन कि.मी. की दूरी पर संवर्धित गहन अंतरिक्ष मिशन योजना एवं संचार प्रबंधन का निर्माण करना है। स्वाुयत्तष त्रुटि संसूचन एवं पुन:प्राप्ति भी मिशन हेतु महत्वापूर्ण होते हैं।

चंद्रयान-1

चंद्रमा के लिए भारत का प्रथम मिशन, चंद्रयान-1 एस.डी.एस.सी. शार, श्रीहरिकोटा से 22 अक्तूमबर, 2008 को सफलतापूर्वक प्रमोचित किया गया था। अंतरिक्षयान चंद्रमा की रसायनिक, खनिज विज्ञानीय एवं प्रकाश-भूविज्ञानीय मानचित्रण हेतु चंद्रमा की सतह से 100 कि.मी. की ऊंचाई पर चंद्रमा के चारों ओर परिक्रमा कर रहा था। अंतरिक्षयान ने भारत, यू.एस.ए., जर्मनी, स्वी्डेन एवं बुल्गायरिया में निर्मित 11 वैज्ञानिक उपकरणों का वहन किया।

चंद्रयान-2

चंद्रयान-2 चंद्रमा के लिए पूर्व चंद्रयान-1 मिशन का उन्नलत वर्शन होगा। चंद्रयान-2 को द्वि-माड्यूल प्रणाली के रूप में संरूपित किया गया है जिसमें इसरो द्वारा विकसित रोवर का वहन करने वाले कक्षित्रयान माड्यूल (आर.सी.) शामिल है।