ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन वाहन

प्रमोचन वाहन के विषय में

ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन वाहन (पीएसएलवी), विश्व के सर्वाधिक विश्वसनीय प्रमोचन वाहनों में से एक है। यह गत 20 वर्षो से भी अधिक समय से अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रहा है तथा इसने चंद्रयान-1, मंगल कक्षित्र मिशन, अंतरिक्ष कैप्सूल पुनःप्रापण प्रयोग (स्पेस कैप्सूल रिकवरी एक्सपरिमेंट), भारतीय क्षेत्रीय दिशानिर्देशन उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) आदि जैसे अनेक ऐतिहासिक मिशनों के लिए उपग्रहों का प्रमोचन किया है। प्रमोचन सेवादाता के रूप में पीएसएलवी कई संगठनों की पहली पसंद है तथा इसने 19 देशों के 40 से अधिक उपग्रहों को प्रमोचित किया है। सन् 2008 में इसने एक प्रमोचन में सर्वाधिक, 10 उपग्रहों को विभिन्न निम्न पृथ्वी कक्षा में स्थापित करने का रिकार्ड बनाया था।

वाहन की विशेषताऍं

ऊंचाई : 44 मी
व्यास : 2.8 मी
चरणों की संख्या : 4
उत्थापन द्रव्यमान : 320 टन (एक्स.एल.)
प्रकार : 3 पीएसएलवी-जी, पीएसएलवी-सीए, पीएसएलवी-एक्सएल)
पहली उड़ान : सितंबर 20, 1993
The PSLV is capable of placing multiple payloads into orbit, thus multi-payload adaptors are used in the payload fairing. This allowed the feat of launching 10 satellites into different orbits in 2008. More recently, on June 30, 2014, PSLV-C23 launched SPOT-7, CAN-X4, CAN-X5, AISAT and VELOX-1 into their designated orbits successfully.
PS4 is the fourth and final stage of PSLV and it uses two liquid इंजनs for propulsion. PS4 is responsible for the correct injection of PSLV's payloads into their respective desired orbits.
PS3 is the third and penultimate stage of PSLV, and it uses a solid rocket for propulsion.
PS2 is the second stage of PSLV and is powered by the Vikas liquid इंजन, developed in the early 90s.
PS1 is the first stage of PSLV and it provides the launcher the high thrust that is required for lift off. It uses the S139 solid rocket booster that contains 138 tonnes of HTPB.
While the PSLV-G uses 6 HTPB based solid strap-on motors of 9 tonnes each and PSLV-XL uses 6 extended strap-ons of 12 tonnes each, the PSLV-CA (core alone version) does not use any strap-on motors.

तकनीकी विशेषताऍं

सूर्य तुल्यकाली ध्रुवीय कक्षा (एसएसपीओ) के लिए नीतभार 1,750 कि.ग्रा.

पीएसएलवी ने अनेक उपग्रहों, विशेषकर आईआरएस श्रृंखला के उपग्रहों को निम्न पृथ्वी कक्षा में भेज कर इसरो के लद्दू घोड़े (वर्क हॉर्स ऑफ इसरो) का खिताब पाया है । यह 1,750 कि.ग्रा. तक भारी नीतभार को 600 कि.मी. की ऊँचाई पर सूर्य तुल्यकाली ध्रुवीय कक्षा में ले जा सकता है।

उप भू-स्थिर अंतरण कक्षा के लिए नीतभार : 1,425 कि.ग्रा.

अपनी अद्वितीय विश्वसनीयता के कारण पी.एस.एल.वी. को विभिन्न उपग्रहों को भू-तुल्यकाली कक्षा तथा आईआरएनएसएस उपग्रह समूह के उपग्रहों को भू-स्थिर कक्षा में भेजने के लिए भी प्रयुक्त किया गया है।

चतुर्थ चरण : पीएस4

पीएसएलवी सबसे ऊपरी चरण पीएस4 है, इसमें दो पृथ्वी संग्रहणीय तरल इंजन लगते हैं ।

इंजन: 2 x पी.एस.-4
ईंधन: एमएमएच + एमओएन
अधिकतम प्रणोद: 7.6 x 2 kN

तृतीय चरण : पीएस3

पीएसएलवी का तीसरा चरण ठोस रॉकेट मोटर होती है, जो प्रमोचन के वायुमंडलीय चरण के पश्चात ऊपरी चरणों को उच्च प्रणोद उपलब्ध कराती है।

ईंधन: एचटीपीबी
अधिकतम प्रणोद: 240 kN

द्वीतीय चरण : पी.एस.2

पीएसएलवी के दूसरे चरण में तरल नोदन प्रणाली केन्द्र द्वारा विकसित पृथ्वी संग्रहणीय तरल रॉकेट इंजन लगा होता है जिसे विकास इंजन के नाम से भी जाना जाता है ।

इंजन: विकास
ईंधन: यूडीएमएच + N2O4
अधिकतम प्रणोद: 799 kN

प्रथम चरण : पीएस1

पीएसएलवी में 6 ठोस स्ट्रैपऑन बूस्टरों द्वारा संवर्धित एस-139 ठोस रॉकेट मोटर का उपयोग किया जाता है ।

इंजन: एस139
ईंधन: एचटीपीबी
अधिकतम प्रणोद: 4800 kN

स्ट्रैपऑन मोटर :

पीएसएलवी द्वारा उसके पीएसएलवी-जी तथा पीएसएलवी-एक्स एल किस्म के रॉकेटों में पहले चरण के दौरान प्रणोद को बढ़ाने के लिए 6 ठोस रॉकेट स्ट्रैपऑन मोटरों का प्रयोग किया जाता है ।

ईंधन: एचटीपीबी
अधिकतम प्रणोद: 719 kN