भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन ने सूपरकम्प्यूटर का निर्माण किया है जो 220 टेराफ्लॉप्स् (220 ट्रिलियन फ्लोटिंग प्वाइंट आपरेशन प्रति सेकेण्ड) के सैद्धान्तिक चरम निष्पादन के अनुसार भारत का सबसे तेज सूपरकम्प्यूटर होगा। सतीश धवन सूपरकम्प्यूटिंग सुविधा नामक सूपरकम्प्यूटिंग सुविधा विक्रम साराभाई अन्तरिक्ष केन्द्र (वीएसएससी), तिरूवनंतपुरम में स्थित है।" सागा-220" (जीपीयू शिल्पकला-220 टेराफ्लॉटस सहित वांतरिक्ष के लिए सूपरकम्प्यूटर) नामक सूपरकम्प्यूटर आधारित नवीन ग्राफिक संसाधन यूनिट (जीपीयू) जटिल वांतरिक्ष समस्याओं के समाधान हेतु अन्तरिक्ष वैज्ञानिकों द्वारा उपयोग किया जा रहा है। सूपरकम्प्यूटर सागा-220 का आज वीएसएससी में डॉ. के राधाकृष्णन, अध्यक्ष, इसरो द्वारा उद्घाटन किया गया।
विक्रम साराभाई अन्तरिक्ष केन्द्र द्वारा बाजार में उपलब्ध हार्डवेयर, ओपन स्त्रोत साफ्टवेयर घटक एवं आंतरिक विकासों का उपयोग करते हुए "सागा-220" सूपरकम्प्यूटर का सम्पूर्ण डिजाइन एवं निर्माण किया गया है। यह प्रणाली अधिक गतिवाले इन्टरकनेक्ट के साथ विप्रो द्वारा आपूर्ति किये गये 400 एनवीआईडीआईए टेल्सा 2070 जीपीयू एवं 400 इन्टेल क्वाड क्रोड जियोन सीपीयू का उपयोग करता है। प्रत्येक जीपीयू तथा सीपीयू, क्रमशः 500 गीगा फ्लॉस तथा 500 गीगाफ्लॉस् का निष्पादन प्रदान करते हुए प्रणाली का सैद्धान्तिक चरण निष्पादन कुल 220 टेराफ्लाप्स होता है। वर्तमान जीपीयू प्रणाली लागत, पावर तथा अन्तरिक्ष आवश्यकताओं के संदर्भ में पारम्परिक सीपीयू आधारित प्रणाली से अधिक लाभदायक है। इस सूपरकम्प्यूटर की कुल लागत लगभग 14 करोड रू है। यह प्रणाली पर्यावरण हितैषी है और केवल 150 कि. वा. के ही पावर की खपत करती है। इस प्रणाली को कई पेटाफ्लॉप्स् (1000टेराफ्लॉप्स्) के साथ आसानी से मापा भी जा सकता है।