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जीएसएलवी ने सफलतापूर्वक दक्षिण एशिया उपग्रह का प्रक्षेपण किया

भारत के भूतुल्यकाली उपग्रह प्रमोचन वाहन (जीएसएलवी-एफ 09) ने आज (मई 05, 2017) को 2230 किलो वजनी दक्षिण एशिया एशिया उपग्रह (जीएसएटी-9) को अपने नियोजित भूतुल्यकाली स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में सफलतापूर्वक प्रमोचित किया। जीएसएलवी का आज का प्रमोचन ग्यारहवां था और सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र शाह (एसडीएससी शार), श्रीहरिकोटा, भारत के स्पेसपोर्ट के द्वितीय प्रमोचन पैड से हुआ था। जीएसएलवी द्वारा स्वदेशी तौर पर विकसित क्रायोजेनिक ऊपरी चरण को ले जाने वाला यह लगातार चौथी सफलता है। अपने अंडाकार जीटीओ में, दक्षिण एशिया उपग्रह अब पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है, जिसमें 169 किमी की उपभू (धरती से निकटतम बिंदु) और 36,105 किमी के अपभू (पृथ्वी पर सबसे दूर वाला बिंदु) के साथ भूमध्य रेखा  पर 20.65 डिग्री के कक्षीय झुकाव के साथ पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है।

लांच की उलटी गिनती शून्य तक पहुंचने के कुछ सेकंड पहले, जीएसएलवी-एफ 09 के चार द्रव प्रणोदक स्ट्रैपऑन-मोटर्स, जिनमें प्रत्येक में 42 टन द्रव प्रणोदक थे, प्रज्वलित हुए थे। शून्य गिनती पर और सभी चार स्ट्रैपऑन-मोटर्स के सामान्य निष्पादन की पुष्टि करने के बाद, 139 टन ठोस प्रणोदक युक्त प्रथम चरण कोर मोटर प्रज्वलित हुआ था और जीएसएलवी ने 16:57 बजे आईएसटी पर उत्थापन किया गया। फ्लाइट के प्रमुख चरण निर्धारण के अनुसार रहे । लिफ्ट-ऑफ के सत्रह मिनट के बाद में, दक्षिण एशिया उपग्रह को सफलतापूर्वक जीटीओ में स्थापित किया गया था। ।

जीएसएलवी से अलग होने के तुरंत बाद, उपग्रह के दो सौर व्यूह स्वतः ही तुरंत प्रस्तरित हो गए और कर्नाटक के हासन के मुख्य नियंत्रण सुविधा (एमसीएफ) ने उपग्रह का नियंत्रण ग्रहण किया।

दक्षिण एशिया उपग्रह दक्षिण एशियाई क्षेत्र में विभिन्न संचार सेवाएं प्रदान करने के लिए इसरो द्वारा निर्मित  संचार उपग्रह है। इसके लिए, यह कू-बैंड ट्रांसपोंडरों से लैस है।

सफल प्रक्षेपण के बाद, भारत के माननीय प्रधान मंत्री, श्री नरेंद्र मोदी जी ने दक्षिण एशियाई नेताओं को संबोधित किया। उन्होंने इसरो को बधाई दी और टिप्पणी की कि आज दक्षिण एशिया के लिए यह ऐतिहासिक दिन और बिना किसी पूर्ववर्ती दिन था। प्रधान मंत्री ने कहा कि दो साल पहले भारत ने दक्षिण एशिया के लोगों के विकास और समृद्धि के हेतु उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का विस्तार करने का वादा किया था और दक्षिण एशिया उपग्रह का सफल प्रक्षेपण आज इसकी पूर्ति करता है ।

आने वाले दिनों में, उपग्रह की कक्षाएं का उत्थान कर उसे वर्तमान जीटीओ से अंतिम वृत्तीय भूस्थिर कक्षा (जीएसओ) में उपग्रह पर द्रव अपभू मोटर (लैम) का प्रज्वलन कर उसे उठाया जाएगा। दक्षिण एशिया उपग्रह को कक्षा में कक्षा उत्थान की समाप्ति और उपग्रह की स्थापित करने और उसके पेलोड के कक्षा परीक्षण के बाद जीएसओ में नामित स्लॉट में स्थित किया जाएगा।

 

Archive of Updates from ISRO

अगस्त 03, 2017 एस्ट्रोसैट आज 10,000वीं कक्षा पूरा करेगा
जुलाई 28, 2017 यू आर राव को श्रद्धांजली
जुलाई 24, 2017 भारतीय उपग्रह कार्यक्रम के आर्किटेक्ट प्रोफेसर यू आर राव का निधन हो गया
जुलाई 03, 2017 जीसैट-17 का 03 जुलाई, 2017 को 07:40 बजे आईएसटी पर 3 अक्षीय स्थिरीकरण सफलतापूर्वक किया गया है। उपग्रह की प्रणालियां सामान्य हैं ।
जुलाई 02, 2017 16:15 बजे आईएसटी पर दोनों सौर व्यूहों और ऐंटना रिफ्लेक्टरों का प्रस्तरण सफलतापूर्वक किया गया है।
जुलाई 02, 2017 जीसैट-17 उपग्रह का तीसरा और अंतिम कक्षा उत्थान करने के लिए लैम इंजन का प्रज्वलन 02 जुलाई, 2017 को 08:51 बजे से 492 सेकंड के लिए सफलतापूर्वक किया गया है।
जुलाई 01, 2017 जीसैट-17 उपग्रह का दूसरा कक्षा उत्थान करने के लिए लैम इंजन का प्रज्वलन 01 जुलाई, 2017 को 11:03 बजे से 2859 सेकंड के लिए सफलतापूर्वक किया गया है।
जून 30, 2017 जीसैट-17 उपग्रह का पहला कक्षा उत्थान करने के लिए लैम इंजन का प्रज्वलन 30 जून, 2017 को 04:11 बजे से 5912 सेकंड के लिए सफलतापूर्वक किया गया है।
जून 29, 2017 कोरू फ्रेंच गुयाना के एरियन-5 VA-238 से जीसैट-17 का सफलतापूर्वक प्रमोचन
जून 27, 2017 एमओआरडी द्वारा जीओएमजीएनआरईजीए के लिए एनआरएससी को टीम पुरस्कार मिला