शुक्र के अध्ययन हेतु अंतरिक्ष आधारित प्रयोगों के लिए अवसर की घोषणा (एओ)

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, अवलोकन क्षमता और कम्प्यूटेशनल प्रौद्योगिकियों में प्रगति के कारण सौर प्रणाली के अध्ययन में पिछले कुछ दशकों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इसने सौर मंडल में जटिल प्रक्रियाओं की विविधता के बारे में हमारे ज्ञान और समझ को बढ़ाया है। ग्रहों के उत्पन्न होने की प्रणालियों और विकसित होने के तरीके के रूप में मिला यह सुराग काफी दिलचस्प है, और वे अलग-अलग और एक-दूसरे के समान कैसे हैं ।
आकार, द्रव्यमान, घनत्व, थोक संरचना और गुरुत्वाकर्षण में समानता के कारण शुक्र को पृथ्वी की "जुड़वां बहन" के रूप में अक्सर वर्णित किया गया है। ऐसा माना जाता है कि दोनों ग्रह समान उत्पत्ति का हिस्सा हैं, जो लगभग 4.5 अरब साल पहले संघनीय निहारिका से बने थे। सूर्य की तुलना में शुक्र लगभग 30% नजदिक है जिससे कि पृथ्वी की तुलना में बहुत अधिक सौर प्रवाह है। शुक्र का अन्वेषण 1960 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ। शुक्र को उड़ान से, कक्षित्र, कुछ लैंडर मिशन और वायुमंडलीय प्रोब से खोजा गया है। शुक्र की खोज में किए गए अत्यधिक प्रगति के बावजूद, उसके सतह/उप-सतह की विशेषताओं और प्रक्रियाओं, शुक्रीय वायुमंडल के सुपर रोटेशन और सौर विकिरण/सौर पवन के साथ इसका विकास और अन्योन्यक्रिया के बारे में हमारी मूलभूत समझ में अभी भी अंतराल मौजूद है ।

इस संदर्भ में, इच्छुक वैज्ञानिकों से भारत के भीतर विलक्षण अंतरिक्ष आधारित प्रयोगों के लिए अनुरोध किया जाता है। भारत में सभी संस्थानों को अवसर की घोषणा (एओ) को प्रदान किया गया है। प्रस्तावों को भेजने वाले वर्तमान में ग्रहों के अन्वेषण के अध्ययन/अंतरिक्ष के लिए विज्ञान के घटकों के विकास/प्रयोगों को विकसित करने के लिए तैयार किए जा सकते हैं। प्रस्ताव के प्रमुख अन्वेषक (i) ऐसे साधनों का आवश्यक विवरण प्रदान करें जो वैज्ञानिक समस्याओं का समाधान कर सकते हैं और (ii) जो उपकरण टीम को एक साथ लाने में सक्षम हो और अंतरिक्ष योग्य साधन विकसित करने के लिए टीम का नेतृत्व कर सके।

प्रस्तावित उपग्रह की पेलोड क्षमता 175 किलो के साथ 500वॉ. ऊर्जा की संभावना है। हालांकि अंतिम विन्यास के आधार पर इन मानों को समायोजित किया जाना है। प्रस्तावित कक्षा शुक्र के लगभग 500 x 60,000 किमी के आसपास होने की उम्मीद है। इस कक्षा को कई महीनों में निम्न एपैप्सिस तक धीरे-धीरे कम किया जाएगा।

प्रस्ताव संस्था के प्रमुख के माध्यम से निम्न को प्रस्तुत किया जाना है (वर्ड प्रारूप में अग्रिम प्रतिलिपि और स्पीड पोस्ट/ ईमेल द्वारा हस्ताक्षरित पीडीएफ प्रति भेजें):
 

कार्यक्रम निदेशक,
अंतरिक्ष विज्ञान कार्यक्रम कार्यालय,
इसरो मुख्यालय, अंतरिक्ष भवन,
न्यू बीईएल रोड,
बैंगलोर -560231
ईमेल:: [email protected]  

The last date for receiving the proposal is extended to May 31, 2017.

 प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए प्रारूप

  1. प्रस्ताव का कार्यकारी सारांश (दो पृष्ठ)
  2.  वैज्ञानिक उद्देश्य
  3. पिछले और समकालीन मिशन की तुलना में अपेक्षित परिणाम और महत्व सहित विस्तृत वैज्ञानिक औचित्य
  4. प्रयोग का द्रव्यमान, शक्ति, मात्रा की आवश्यकता
  5. अंतरिक्ष यान से कोई अन्य विशेष आवश्यकता
  6. प्रयोगशाला मॉडल/सत्यापन मॉडल के पूरा होने के लिए विस्तृत पीईआरटी चार्ट और समय सारिणी, जिसका समान डिजाइन और उड़ान मॉडल के लगभग समान आकार होना चाहिए।
  7.  इसके अलावा, योग्यता मॉडल के विकास, परीक्षण और अंशांकन के लिए आवश्यक समय अवधि को सूचित करना चाहिए (द्रव्यमान, आकार और डिजाइन में उड़ान मॉडल के समान होना चाहिए और सभी पर्यावरणीय परीक्षणों से गुजरना चाहिए) और परियोजना प्रस्ताव के लिए उड़ान मॉडल T0 से T0 मानते हुए अनुमोदन की तिथि ।
  8. प्रयोग के लिए अंशांकन प्रक्रियाएं और डेटा प्रोसेसिंग, विश्लेषण, निर्माणाधीन सॉफ्टवेयर के लिए योजनाएं
  9. पेलोड के विकास और अंशांकन के लिए आपके संस्थान/प्रयोगशाला में उपलब्ध सुविधा
  10. वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग टीम जिन्हें शामिल करने का प्रस्ताव है और संबंधित क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और उपलब्धियां।
  11. सालाना बजट की आवश्यकता
  12. अनुलग्नक -1 में नीचे दी गई सारांश तालिका

प्रयोगों के सबसे इष्टतम अर्हता की पहचान करने के लिए, प्रस्तावकर्ता को अनुरोध किया जाएगा कि वे समीक्षा समिति को और जब आवश्यक हो प्रस्तुति दें । अंतिम चयनित प्रस्तावों में समीक्षा समिति द्वारा किए गए सुझावों को शामिल किया जाएगा।

    यहां क्लिक करें अनुलग्नक -1