इसरो तथा भारतीय हवाई पत्तन प्राधिकरण द्वारा संयुक्त रुप से एक वैश्विक नौसंचालन उपग्रह प्रणाली (जी.एन.एस.एस) उपभोक्ता बैठक का आयोजन इसरो उपग्रह केन्द्र, बेंगलुरु में आज अर्थात् दिनांक 23 फरवरी, 2012 को हुई। डॉ टी.के.अलेक्स, सदस्य, अन्तरिक्ष आयोग तथा निदेशक, इसरो उपग्रह केन्द्र (आईजेक) बेंगलुरु ने गोष्ठी का उद् घाटन किया। श्री इ.के. भारत भूषण, महा निदेशक, डी.जी.सी.ए भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान दो तकनीकी सत्र और एक पैनल संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। श्री ए.एस.गणेशन, परियोजना निदेशक, परियोजना प्रणाली द्वारा गगन तथा आई.आर.एन.एस.एस. नौसंचालन परियोजना का समग्र परिचय सभासदों को कराया गया। तकनीकी सत्र के दौरान उपग्रह आधारित नौसंचालन क्षेत्र के निष्णात व्यक्तियों ने अपने अनुभव तथा नौसंचालन संकेतों का यथावत् स्थान निर्धारण की अधिकतम उपयोगिता और सिविल वैमानकीय और कई अन्य सेवाओं संबंधी जानकारी प्रदान की। इस संदर्भ में अग्रणीय भारतीय उद्योगों द्वारा तैयार किये गये उत्पादों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।
" भारतीय क्षेत्र पर नौसंचालन संकेतो की उपयोगिता के अवसर तथा चुनौतियां " विषय पर एक परिसंवाद कार्यक्रम श्री एस.के.शिवकुमार, सह निदेशक, आईजेक की अध्यक्षता में हुई, जिसमें शिक्षाविदों, उद्योग तथा इसरो के जानेमाने हस्थियों ने भाग लिया।
नौसंचालन मानव गतिविधियों का एक हिस्सा है। उपग्रह आधारित नौसंचालन प्रणाली स्थान निर्धारण, वेग तथा समय सेवाएं प्रदान करती है। इसरो ने उपग्रह आधारित संवर्धन प्रणाली को गगन (जी.पी.एस अनुदानित तथा जीईओ संवर्धित नौसंचालन) और आई.आर.एन.एस.एस (भारतीय क्षेत्र नौसंचालन उपग्रह प्रणाली) योजनाओं को महत्वपूर्ण प्रणोद क्षेत्र के रुप में मान्यता दी है।
भारतीय वायु क्षेत्र तथा जीवोपयोगी सुरक्षा हेतु इसरो और भारतीय हवाई पत्तन प्राधिकरण ने गगन परियोजना को उपग्रह आधारित संवर्धन प्रणाली (एस.वी.ए.एस) के रुप में कार्यान्वित किया है। दिसम्बर 15,2011 से गगन,अन्तरिक्ष में संकेत सेवा अब सिविलीयन प्रयोक्ताओं को उपलब्ध हो रही है।
इसरो द्वारा विकसित भारतीय क्षेत्रीय नौसंचालन उपग्रह प्रणाली (आई.आर.एन.एस.एस) क्षेत्रीय नौसंचालन उपग्रह प्रणाली है जो भारतीय क्षेत्र पर नौसंचालन सेवाएं हर मौसम में चौबीसो घंटे प्रयोक्ता को स्थान निर्धारण में परिशुद्दता प्रदान करेगी, जो 20 मीटर से बेहतर होगी।
सरकार, उद्योग, शैक्षिक संस्थाओं से 250 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उपभोक्ता बैठक का उद्देश्य जी.एन.एस.एस. आधारित उपयोगों के विकास में प्रणोद प्रदान करना और भारत में गगन और आई.आर.एन.एस.एस. संकेतों का उपयोग करते हुए प्रयोक्ता अभिग्राही का सदुपयोग करना है। उद्योग, उपभोक्ता और सेवा प्रदान करने वालों के बीच इस तरह की प्रयोक्ता गोष्ठी एक कडी है जो नौसंचालन के उन्नयन के लिए सूचना का आदान प्रदान करने में, परिवहन, अपदा प्रबंधन, पर्यावरण तथा कृषि क्षेत्र के लिए उपग्रह प्रणाली स्थान निर्धारण करेगी। यह गोष्ठी उद्योगपतियों को नौवहन संकेतो तथा स्पिन-आफ का उपयोग करने में सहायक सिद्ध होगी।