रविवार, 23 नवम्बर 2014
 
 
 
 
 
भूतुल्यकाली उपग्रह प्रमोचक रॉकेट (जीएसएलवी) मार्क I व II, इन्सैट-2 श्रेणी के उपग्रहों (2000 - 2500 कि.ग्रा.) को भू-तुल्यकाली अंतरण कक्षा (जीटीओ) में स्थापित करने में सक्षम है। जीएसएलवी एक तीन चरणों वाला यान है, जिसकी ऊँचाई 49 मी. और उत्थापन भार 414 टन है। नीतभार फ़ेयरिंग पर इसका अधिकतम व्यास 3.4 मी. है। पहले चरण में 6 द्रव (एल 40) स्ट्रैप-ऑन के साथ एस 125 ठोस बूस्टर समाविष्ट है। दूसरा चरण (जीएस 2) द्रव इंजन है और तृतीय चरण (जीएस 3) निम्नतापीय चरण है। यान 6573 केएन उत्थापन प्रणोद उत्पन्न करता है।
जीएसएलवी की प्रथम उड़ान 1540 कि.ग्रा. भार वाले जीसैट-1 के प्रमोचन द्वारा 18 अप्रैल, 2001 को शार से संपन्न हुई। इसके बाद 6 और प्रमोचन हुए, 8 मई 2003 को जीएसएलवी-डी2 (जीसैट-2 1825 कि.ग्रा.), 20 सितंबर 2004 को जीएसएलवी-एफ]01 (एडुसैट 1950 कि.ग्रा.), 10 जुलाई 2006 को जीएसएलवी-एफ़02, 2 सितंबर, 2007 को जीएसएलवी-एफ़04 (इन्सैट-4 सीआर 2,130 कि.ग्रा.), 15 अप्रैल, 2010 को जीएसएलवी डी-3 ।

जीएसएलवी के प्रतिरूपी प्राचल
 उत्थापन भार 414 टन
नीत भार भू-तुल्यकाली अंतरण कक्षा (जीटीओ) में 2 से 2.5 टन
ऊँचाई 49 मीटर
जीएसएलवी उपलब्धियाँ
जीएसएलवी-एफ़06 ने 25 दिसम्बर, 2010 को जीसैट-5पी का प्रमोचन किया (असफल)
जीएसएलवी-डी3 ने 15 अप्रैल, 2010 को जीसैट-4 का प्रमोचन किया (असफल)
जीएसएलवी-एफ़04 ने 2 सितंबर, 2007 को इन्सैट-4सीआर का प्रमोचन किया (सफल)
जीएसएलवी-एफ़02 ने 10 जुलाई, 2006 को इन्सैट-4सी का प्रमोचन किया (असफल)
जीएसएलवी-एफ़01 ने 20 सितंबर, 2004 को एडुसैट (जीसैट-3) का प्रमोचन किया (सफल)
जीएसएलवी-डी2 ने 8 मई, 2003 को जीसैट-2 का प्रमोचन किया (सफल)
जीएसएलवी-डी1 ने 18 अप्रैल, 2001 को जीसैट-1 का प्रमोचन किया (सफल)
कॉपीराइट 2008 इसरो, सर्वाधिकार सुरक्षित.
 
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